मैंने सफलता के साथ असफलता भी पाई : बोयर
बोन, 9 जून (आईएएनएस)। इस माह के अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन समिति के प्रमुख यो दे बोयर ने कहा है कि उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल के दौरान सफलताएं और असफलताएं दोनों पाई हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के प्रयासों के अंतर्गत कानूनी बाध्यता लागू करने से पहले 'समन्वित प्रयास' करना जरूरी है।
जलवायु परिवर्तन के विषय में पहले बंद कमरों में चर्चा होती थी और बाकी दुनिया को इसके बारे में बहुत कम जानकारियां दी जाती थीं लेकिन 2006 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन समिति के मुख्य सचिव बनने के बाद बोयर ही इस मुद्दे को मजबूती से दुनिया के सामने लेकर आए।
पिछले दिसंबर में कोपेनहेगन में हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को असफल करार दिया गया है। आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में बोयर ने कहा कि 2007 में बाली में हुई बैठक में हमने महत्तवपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।
बोयर ने याद करते हुए कहा कि यहां विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कोष मुहैय्या कराने के लिए वित्तीय साधनों का निर्माण किया जा सकता था। जलवायु परिवर्तन से पूरी दुनिया में फसलों का उत्पादन घट रहा है, सूखा, बाढ़, तूफान की स्थितियां पैदा हो रही हैं और समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, "मेरे कार्यकाल के दौरान मैंने सरकारों के व्यापार और वित्त मंत्रियों को जलवायु परिवर्तन वार्ता से जोड़ा क्योंकि इस समस्या का समाधान आर्थिक हितों से जुड़ा है।"
कोपेनहेगन सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित 120 देशों की सरकारों के प्रमुख एकत्रित हुए थे।
बोयर ने कहा कि कोपेनहेगन में हमें निराशा हासिल हुई कोई इसे सफल नहीं कह सकता। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं को ज्यादा आंकने वालों में से नहीं हूं लेकिन मैं नही समझता कि इस असफलता के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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