भोपाल गैस कांड के फैसले से पीड़ित दुखी
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहन पी. तिवारी ने सोमवार को अपने फैसले में चार अलग-अलग धाराओं के तहत यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) पर 5,01,725 रुपये का जुर्माना किया है, वहीं सात अन्य आरोपियों पर 1,01,725 रुपये का जुर्माना व कारावास की सजा सुनाई है। इन सभी आरोपियों को जमानत भी मिल गई है।
बागमुती इलाके में रहने वाले शेख इस्माइल कहते हैं कि आज जो फैसला आया है, उसने उनके दुख को और बढ़ा दिया है। वे पिछले 23 साल से उम्मीद लगाए थे कि भोपाल के दुश्मन वारेन एंडरसन को केंद्र सरकार न्यायालय तक लाने में सफल होगी और उसे व अन्य दोषियों को फांसी की सजा मिलेगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। वह कहते हैं, "हमने बहुत कुछ खोया है, मगर दोषियों को वैसी सजा नहीं मिली, जिसकी तमन्ना रखते थे।"
शांता बाई तो आरोपियों को दो साल की सजा की खबर सुनते ही फफक पड़ी और कहा कि गैस कांड ने तो उनकी जिंदगी ही तबाह कर दी है, मगर इसके कसूरवारों को महज दो साल की सजा सुनाई गई है। उनका एक बेटा जान गंवा चुका है और पति अपाहिज हो गया है। गैस कांड ने उन्हें जो दर्द दिया है, उसके मुकाबले यह सजा कुछ भी नहीं है।
जहांगीराबाद में रहने वाली मालती बाई अन्य लोगों के साथ ही सुबह से ही न्यायालय परिसर में यह सोचकर पहुंची थीं कि आरोपियों को जब फांसी की सजा सुनाई जाएगी तो उन्हें कुछ सुकून मिलेगा। वह कहती हैं कि यह फैसला गैस कांड से मिले जख्म पर मलहम लगाने के बजाय नमक लगाने जैसा है।
राधा बाई की सिर्फ एक ही ख्वाहिश है कि गैस कांड के आरोपियों को सजा तो मिले ही, वारेन एंडरसन को एक बार जरूर भोपाल की जनता के सामने लाया जाए। वह कहती हैं कि सीजीएम न्यायालय के फैसले ने उन्हें निराश तो किया है, मगर लड़ाई जारी रखने का हौसला भी दिया है।
सोमवार को सुबह से ही न्यायालय परिसर में बड़ी तादाद में गैस पीड़ित फैसला जानने के लिए जमा हुए थे। वहीं प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पीड़ितों की भीड़ फैसला आने तक यानी लगभग दो बजे तक परिसर में ही धूप में खड़ी रही। जैसे ही आरोपियों को अर्थदंड और दो साल के कारावास की सजा मिलने की खबर मिली, वैसे ही उनका गुस्सा फूट पड़ा। गैस पीड़ितों ने परिसर में ही नारेबाजी शुरू कर दी और 'एंडरसन को फांसी दो' के नारे लगाने लगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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