इंसुलिन इंजेक्शन की जगह ले सकती हैं गोलियां

वाशिंगटन, 3 जून (आईएएनएस)। दुनियाभर के लाखों मधुमेह पीड़ितों के लिए रक्त में मौजूद शर्करा की मात्रा नियंत्रित करना आसान बनाने के लिए इंसुलिन की गोलियों का चिकित्सकीय परीक्षण अब आखिरकार शुरू होने जा रहा है।

दवा निर्माता वर्षो से इंसुलिन की गोलियां बनाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली थी। बरसों की असफलताओं के बाद अब इंसुलिन की बहुत सी गोलियां चिकित्सकीय परीक्षण के लिए तैयार हैं। यदि ये परीक्षण सफल रहे तो इनका बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हो जाएगा। इंसुलिन एक पेप्टाइड हार्मोन है।

इंजेक्शन लेने में होने वाली परेशानियों के चलते मरीज रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए इनका बार-बार इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।

इंसुलिन की गोलियां इस परेशानी को दूर कर सकती हैं हालांकि पेट में रहने वाले अम्ल और एंजाइम्स इंसुलिन व अन्य प्रोटीन आधारित दवाओं का आसानी से विघटन कर सकते हैं। वैज्ञानिकों को इस परेशानी को दूर करने में कठिनाइयां होती रही हैं।

अब वैज्ञानिकों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए विशेष आवरण वाली इंसुलिन की गोलियां बनाई हैं। आवरण के चलते पेट में मौजूद अम्ल इन गोलियों का विघटन नहीं कर सकेंगे।

इंसुलिन जैसे बड़े अणुओं का आंत में आसानी से अवशोषण हो सके इसके लिए वैज्ञानिक कुछ यौगिकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वर्तमान में मधुमेह के मरीज अपने रक्त में शर्करा का स्तर सामान्य रखने के लिए इस हार्मोन के इंजेक्शन लेते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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