इसराइली हमले की कड़ी निंदा

फ़लस्तीन के लिए इस राहत सामग्री का इंतज़ाम तुर्की की एक चैरिटी ने किया था और जहाज़ों पर मौजूद अधिकतर कार्यकर्ता तुर्की के नागरिक हैं. इसराइल ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि वो गज़ा में किसी जहाज़ को प्रवेश नहीं करने देगा. तुर्की में इस हमले का कड़ा विरोध हो रहा है.तुर्की टेलीविज़न पर दिखाई जा रही तस्वीरों में इसराइली सैनिकों को बेड़े पर मौजूद कार्यकर्ताओं से लड़ते हुए दिखाया गया है. तुर्की मीडिया के अनुसार इसमें कई दर्ज़न लोग घायल हुए हैं. इस्तांबूल में बड़ी संख्या में लोग इसराइली वाणिज्य दूतावास के बाहर जमा हो गए हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रतिक्रिया
फ़्रांस ने कहा है कि रसद से लदे जहाज़ों पर हमले को किसी भी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. कई देशों के विदेश मंत्रालयों ने इसराइल के राजदूतों को बुलाकर इस घटना के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है. यूरोपीय संघ ने इस मामले की पूरी जांच की मांग की है. उधर अरब लीग इस घटनाक्रम पर एक आपातकालीन बैठक कर रहा है. ग्रीस ने विरोध जताते हुए इसराइल के साथ सांझा सैन्य अभ्यास से हाथ खींच लिए हैं.
घटना
फ़लस्तीनियों के लिए राहत सामग्री ले जा रहे जहाज़ों पर इसराइली सैनिक हेलीकॉप्टर के ज़रिए उतरे और उसके बाद कार्यकर्ताओं और सैनिकों में संघर्ष हुआ. सेना के अनुसार जहाज़ पर कार्यकर्ताओं ने उन पर चाकू और लाठियों से हमला किया जिसके जवाब में कार्रवाई की गई और दस कार्यकर्ता मारे गए. इसराइल ने यह हमला गज़ा से क़रीब साठ किलोमीटर दूर समु्द्र में किया है. यह इलाक़ा अंतरराष्ट्रीय समुद्री जल के अंतर्गत आता है. सेना का कहना है कि घटना में चार इसराइली सैनिक घायल भी हुए हैं. इसराइल के एक मंत्री बिनयामिन बेन एलिज़र ने कार्यकर्ताओं के मारे जाने पर अफ़सोस प्रकट किया है.












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