नेपाल में राजनीतिक संकट टला या खिंचा, कहना मुश्किल
संविधान निर्माण के लिए दिया एक साल
शुक्रवार की अर्ध रात्रि में हुए संसद के अधिवेशन के बाद नेपाल के 601 सांसदों को 27 मई 2011 तक यानी ठीक एक साल बाद तक का समय दिया गया है। अंतरिम संसद को यह समय नए संविधान का निर्माण करने के लिए दिया गया है। गौरतलब है कि अंतरिम संसद के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल ने निर्धारित समय सीमा के भीतर भी देश का संविधान निर्माण ना किये जा सकने की जिम्मेदारी लेते हुए इसके लिए माओवादियों को दोषी ठहराया था। लेकिन नेपाल का इतिहास समय सीमा में काम पूरा ना किये जाने का गवाह रहा है।
सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल सदभावना पार्टी के सांसद अनिल कुमार झा इस बाबत कहते हैं, "अपनी पार्टी के आदेश को मानते हुए मैंने अंतरिम संसद के कार्यकाल में वृद्धि किए जाने के पक्ष में मत दिया है। हालांकि मुझे नहीं लगता कि नया संविधान एक बरस में पूरा हो सकेगा।" इस प्रस्ताव को 585 सदस्यीय संसद के 580 सदस्यों ने मंजूरी दी। दक्षिणी नेपाल के तराई क्षेत्र के एक सांसद और नेपाल की इकलौती शाही पार्टी के चार सदस्यों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।
नेपाल पर इस्तीफे का दबाव
माओवादी पार्टी के नेता पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने काठमांडू में जनसभा में कहा, "सत्तारूढ़ पार्टियां नया संविधान नहीं चाहतीं। उन्हें अगर चार साल और भी दे दिए जाएं तो भी वे नया संविधान नहीं तैयार कर सकतीं।" हालांकि माओवादियों ने भी सदन के कार्यकाल की अवधि समाप्त होने का समय आने से ठीक पहले इसे एक साल बढ़ाने के लिए मंजूरी दे दी है।
इस घटनाक्रम के बाद भी नेपाल पर पद छोड़ने का दबाव जारी है। माओवादियों का दावा है कि नेपाल पांच दिन में जाएंगे ताकि नई सरकार का गठन हो सके। लेकिन इस बदलाव में सुगम तरीके से संपन्न होने के आसार नहीं हैं। ऐन मौके पर राजनीतिक दलों में बनी इस सहमति को नेपाली जनता संदेहास्पद निगाह से देख रही है।













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