भारतीय शैली का 'बौद्ध मंदिर' चीन को समर्पित (लीड-1)
ल्यूयेंग (चीन), 29 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने करोड़ों भारतवासियों की ओर से शनिवार को भारतीय शैली से बने 'बौद्ध मंदिर' को चीन की जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार और पारम्परिक तरीके से किए गए स्वागत से राष्ट्रपति भावविभोर हो उठीं।
इस ऐतिहासिक मौके पर राष्ट्रपति ने कहा, "आने वाली पीढ़ियां भी हमारी दोस्ती की इस अमिट पहचान को याद रखेगी।"
छह दिवसीय चीन दौरे पर ल्युयेंग पहुंची राष्ट्रपति के स्वागत में सैकड़ों लोग मंदिर के बाहर खड़े थे। इस मौके पर उन्होंने कहा, "यहां पहुंचकर और भारतीय शैली में बने बौद्ध मंदिर को आपको भेंट कर, मैं बहुत ही प्रफुल्लित महसूस कर रही हूं। मैं इसे चीन और भारत की दोस्ती को समर्पित करती हूं। यह भारतीय और चीनी सभ्यता की विशिष्ट पहचान है।"
यह मंदिर मध्य प्रदेश के सांची स्थित बौद्ध स्तूप से प्रेरित होकर बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण प्रथम शताब्दी में निर्मित बाएमा सी मंदिर (श्वेत अश्व मंदिर) के बेहद करीब किया गया है।
इस मंदिर का निर्माण उन दो भारतीय बौद्ध भिक्षुओं के सम्मान में कराया गया था जो धार्मिक ग्रंथों और भगवान बुद्ध की प्रतिमा को घोड़ों की पीठ पर लादकर यहां पहुंचे थे।
मंदिर में 16 फीट ऊंची भगवान बुद्ध की प्रतिमा है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि सांची स्तूप स्थित बुद्ध की प्रतिमा से प्रेरित होकर इसे बनाया गया है।
मंदिर की परिकल्पना और इसकी डिजाइन ही भारतीय नहीं है बल्कि इसके निर्माण में इस्तेमाल किए गए अवयव भी भारतीय हैं। इसके निर्माण के लिए राजस्थान के कोटा से तराशे गए पत्थर और संगमरमर मंगवाए गए थे।
पाटील ने कहा, "इस मंदिर का निर्माण दोनों देशों के लोगों और संगठनों की समर्पित सेवा का ही नतीजा है। मैं उम्मीद करती हूं कि यह मंदिर दोनों देशों के लोगों को जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।"
मंदिर में स्थित प्रतिमा का निर्माण चुनार से मंगवाए गए बलुआ पत्थर से किया गया है। इसी पत्थर से वाराणसी के सारनाथ स्थित बौद्ध मंदिर की प्रतिमा निर्मित है।
मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो द्वारपालक मौजूद रहते हैं। मंदिर में भगवान बुद्ध की चरण पादुका भी है, जिसकी पूजा होती है। मंदिर परिसर बहुत ही सुंदर और सुसज्जित है।
इस मंदिर के निर्माण की प्रस्तावना 2003 में चीन की ओर से रखी गई थी जब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ल्युयेंग के दौरे पर गए थे। उन्होंने चीन के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।
वर्ष 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के चीन दौरे के दौरान इस संबंध में एक समझौता पत्र पर दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर हुए थे।
चीनी सरकार द्वारा प्रदान 6000 वर्ग मीटर जमीन पर बने इस मंदिर के निर्माण में भारत की ओर तकनीकी, वित्तीय और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान की गई थी।
राष्ट्रपति पाटील छह दिनों की चीन यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा 31 मई को समाप्त हो रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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