श्रीकालहस्ती मंदिर के प्रवेश द्वार का होगा पुनर्निर्माण (लीड-1)
प्रदेश के मुख्यमंत्री के. रोसैया ने गुरुवार को कहा कि महाराजा कृष्णदेवराय द्वारा निर्मित इस प्रवेश द्वारा का पुनर्निर्माण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की मदद से किया जाएगा।
रोसैया ने कहा, "हमने प्रवेश द्वार के पुनर्निर्माम के लिए पुरातत्व विभाग से संपर्क किया है। हम चाहते हैं कि इसका निर्माण वैज्ञानिक आधार पर किया जाए।"
रोसैया ने इस ऐतिहासिक 'राजगोपुरम' के ढहने पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इसकी जांच के आदेश पहले ही दे दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, "इस मुद्दे पर गौर किया जाएगा। मेरे पास इसके ढहने के कारणों का कोई तैयार जवाब नहीं है। इसकी जांच होगी।"
इससे पहले, पुलिस ने जानकारी दी कि 136 फुट ऊंचे इस ऐतिहासिक प्रवेश द्वार में हाल ही में दरारें आ गई थीं। किसी अनहोनी की आशंका के चलते इसके करीब स्थित सभी दुकानों को पहले ही स्थानांतरित कर दिया गया था।
पुलिस ने बताया कि बुधवार को आखिरकार यह प्रवेश द्वार गिर गया लेकिन इस घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं हैं हालांकि 100 बंदरों के दब कर मरने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
इस प्रवेश द्वार को विजयनगर के राजा श्रीकृष्णदेवराय ने वर्ष 1516 में अपनी विजययात्रा के दौरान बनवाया था। घटना के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां जमा हो गए और इस ऐतिहासिक धरोहर को संजोने को लेकर बरती गई लापरवाही के लिए सरकार को कोसने लगे।
गौरतलब है कि इंजीनियरों ने मंगलवार को निरीक्षण करने के बाद इस सात मंजिली संरचना के चारों ओर 150 मीटर क्षेत्र को खतरनाक घोषित कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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