राजस्थान के अभ्यारण्यों में बनेंगे छोटे बांध और तालाब
जयपुर, 25 मई (आईएएनएस)। राजस्थान सरकार पानी की किल्लत से जूझ रहे अपने वन्यजीव अभ्यारण्यों में छोटे बांध और तालाबों का निर्माण कराएगी। सरकार यह कदम अभ्यारण्य के जानवरों को पानी की तलाश में आसपास के गांवों में जाने से रोकने के लिए उठा रही है।
एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, " पहले चरण में रणथंभौर स्थित सरिस्का और सवाई मानसिंह अभ्यारण्यों में 41 करोड़ की लागत से जलस्रोतों का निर्माण कराया जाएगा। अगले चरण में अन्य सभी अभ्यारण्यों और पार्को को इस योजना में शामिल किया जाएगा। योजना पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होने की उम्मीद है।"
अधिकारी ने बताया कि जलस्रोतों के निर्माण की जगहों को चिह्न्ति करने के बाद वहां नवंबर तक निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। देश के इस रेगिस्तानी प्रदेश को अपने यहां दो बाघ सरंक्षण, एक पक्षी और 25 वन्यजीवन अभ्यारण्य रखने का गौरव प्राप्त है। ये सभी संरक्षित क्षेत्र घरेलू और विदेशी पर्यटकों को लुभाते हैं।
तापमान में वृद्धि होने से यहां के जलस्रोत या तो सूख गए हैं या सूखने के कगार पर हैं। वन विभाग हालांकि इन जगहों पर पानी की आपूर्ति का दावा करता है, लेकिन उसके इस दावे से वन्यजीव अधिकार कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं हैं।
गैर सरकारी संगठन पीपुल फॉर एनिमल (पीएफए) के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने कहा, "कुछ वन्यजीव संरक्षण केंद्र और पार्को में पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।"
कोटा के दारा वन्यजीव अभ्यारण्य में छोटे तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके चलते जानवर पानी की तलाश में गांवों का रुख कर रहे हैं।
इस अभ्यारण्य के समीप स्थित गांव लक्ष्मीपुरा निवासी नानूराम ने कहा, "अभ्यारण्य से पानी की तलाश में आने वाले जानवरों के चलते उनका जीवन खतरे में रहता है।"
अभी हाल ही में गांव भोजपुरा में लोगों ने एक तेंदुए को पीटकर मार डाला था। इसके अलावा जालौर जिले में भी भालुओं के मानव बस्तियों में आने की घटनाएं हो चुकी हैं। भरतपुर के केवोलदेव पक्षी अभ्यारण्य भी पानी की किल्लत से जूझ रहा है। यह अभ्यारण्य देशी और विदेशी पक्षियों की मनपसंद जगह है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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