नक्सलियों के खिलाफ हवाई हमले के खिलाफ हैं रमन सिंह (लीड-2)
नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बुधवार को कहा कि वह नक्सलियों के खिलाफ हवाई हमले के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे अतिरिक्त क्षति होने का डर है।
उन्होंने कहा कि विस्फोट होने की स्थिति में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों लग जाते हैं। सेना के हेलीकॉप्टरों का यहां इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा आपातस्थिति में राशन पहुंचाने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
रमन सिंह ने कहा कि वह हवाई शक्ति के इस्तेमाल का समर्थन नहीं करते क्योंकि छत्तीसगढ़ में घने जंगल हैं जहां जनजातियां रहती हैं। यदि यहां हवाई हमला होता है तो जनजातियों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि इस इलाके में बमबारी करना संभव नहीं है। यह कोई युद्ध नहीं है।
रमन सिंह ने नक्सलियों को सबसे बड़े आतंकवादी करार देते हुए बुधवार को कहा कि नक्सलवाद देश में आतंकवाद का सबसे घिनौना स्वरूप है। रमन सिंह का यह बयान दो दिन पहले नक्सलियों द्वारा छत्तीसगढ़ में 35 लोगों की हत्या किए जाने के बाद आया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इनके (नक्सलियों) संबंध पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से हो सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास इस बात की पुष्टि नहीं है लेकिन ऐसे संकेत जरूर हैं कि नक्सलियों का लश्कर के आतंकवादियों के साथ संबंध हो सकता है।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "नक्सलवाद भारत में आतंकवाद का सबसे घिनौना स्वरूप है। पिछले 10 वर्षो में नक्सली हिंसा में एक हजार नागरिकों की मौत हो चुकी है।"
सिंह ने कहा कि नागरिकों को मारना, सार्वजनिक परिवहन साधनों को निशाना बनाना, स्कूल बसों को निशाना बनाना, 'जन अदालतों' के माध्यम से लोगों को सजा देना और उन्हें मारना-पीटना एक तरह का आतंकवाद ही है।
बकौल सिंह, "आपकी समझ से ये सब घटनाएं क्या हैं। क्या यह आतंकवाद नहीं है। नक्सली क्या आतंक नहीं फैला रहे हैं। लोग नक्सलियों के साथ नहीं हैं और यही कारण है कि दो दिन पहले एक यात्री बस को निशाना बनाया गया। उन्हें पसंद नहीं कि लोग सरकार के साथ हैं।"
रमन सिंह बुधवार को राजधानी पहुंचे। दिन के दूसरे पहर में उनका प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने का कार्यक्रम था। सिंह ने हालांकि यह भी कहा कि नक्सली समस्या से रातों-रात नहीं निपटा जा सकता, इसके लिए दीर्घकालीन रणनीति बनानी होगी और साथ ही लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई के लिए भी तैयार रहना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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