अफजल गुरु की फांसी का मामला फिर लटका
दरअसल दिल्ली सरकार का कहना है कि अफजल गुरु की फांसी से कानून व्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव को देखना जरूरी है और इसी बिंदु पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए उप राज्यपाल ने फाइल सरकार को लौटा दी। उप राज्यपाल ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है कि कानून-व्यवस्था पर प्रभाव के बारे में वह क्या कहना चाहती है? सूत्रों के मुताबिक उप राज्यपाल कार्यालय की मुहर के बाद ही फाइल गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी।
इस मामले में गृह मंत्रालय के 16 वें रिमाइंडर पर दिल्ली सरकार की नींद टूटी और उसने अफजल गुरु की फाइल आगे सरकाई। दिल्ली सरकार पिछले चार साल से इस मामले को लटकाए हुए थी। मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अफजल गुरु की फंसी का मामला फिर से गर्माया।
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सोमवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने उस मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया था, जिसमें गृह मंत्रालय की ओर से उसे रिमाइंडर भेजे जाने का जिक्र किया गया था। ये भी कहा जा रहा है कि गृह मंत्रालय अफजल मामले में दिल्ली सरकार की भूमिका से संतुष्ट नहीं है। उसने राज्य सरकार को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर याद दिलाया है कि अफजल की दया याचिका पर उसकी टिप्पणी अब तक नहीं मिली है औऱ जल्द से जल्द इस दिशा में कार्रवाई की जाए।
अफजल गुरु को 13 दिसंबर 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले का दोषी पाया गया था। दिल्ली के कोर्ट ने 18 दिसंबर 2002 को उसे मौत की सजा सुनाई थी। फिर दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2003 को उसकी सजा बरकरार रखी। उसके बाद अगस्त 2005 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा को सही ठहराया।













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