बस्तर में बंद के दूसरे दिन जनजीवन अस्त-व्यस्त
पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने यहां बताया कि सोमवार को पूर्व बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों के हमले में 35 लोग मारे गए थे। इस हमले के दो दिन बाद भी नागरिक अभी तक आतंकित हैं।
बसें नहीं चल रही हैं और दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर और कांकेर पांचों जिलों के वनक्षेत्रों में नक्सलियों ने लकड़ी के लट्ठे लगाकर रास्तों पर अवरोध लगा दिए हैं। 40,000 वर्गकिलोमीटर का बस्तर क्षेत्र 1980 के दशक के आखिर से ही नक्सली हिंसा का केंद्र रहा है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया बंद का पहला दिन शांतिपूर्वक गुजरने पर मंगलवार को राहत की सांस ली गई। उन्होंने कहा कि बस्तर में अभी तक आतंक की स्थिति बनी हुई है।
पुलिस मुख्यालय में राज्य खुफिया ब्यूरो में तैनात एक अधिकारी ने बताया, "राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 40,000 सुरक्षाकर्मी बस्तर में तैनात हैं और नक्सलियों को कुचलने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। ..लेकिन आप उन छापामारों के खिलाफ ज्यादा कुछ कर नहीं सकते, जिन्होंने बस्तर को बारूदी सुरंगों से भर दिया है।"
इस क्षेत्र में वर्ष 2005 से ही घातक नक्सली हमले जारी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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