नए प्रतिबंधों के निशाने पर ईरानी बैंक, जहाजरानी, हथियार आयात (लीड-1)

नए प्रतिबंधों के मसौदे का विवरण न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सुरक्षा परिषद के सदस्यों के सामने रखा गया। इससे कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने वाशिंगटन में कहा था कि नए प्रतिबंधों पर सुरक्षा परिषद के सभी स्थाई सदस्यों और जर्मनी से सहमति ली गई है।

संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत विताली चरकिन ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी सरकार ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं लेकिन उनके देश को मसौदे की भाषा पर ऐतराज नहीं है।

चुरकिन ने कहा कि रूस इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक नहीं है। अमेरिका ने अकेले ही मंगलवार को सुरक्षा परिषद में प्रतिबंधों का मसौदा पेश करने का फैसला किया है और यह रूस का निर्णय नहीं है।

सुरक्षा परिषद के पांचों स्थाई सदस्यों-अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस के साथ जर्मनी ईरान के परमाणु कार्यक्रम विवाद को हल करने के प्रयास में है।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत सूसन राइस ने कहा कि नए उपायों में वर्ष 2006 के बाद से लागू तीन प्रतिबंध प्रस्तावों को शामिल किया गया है और इसमें परमाणु कार्यक्रम बंद करने से इंकार करने वाले ईरान के खिलाफ दंडात्मक उपाय होंगे।

राइस ने कहा कि नए प्रतिबंधों से ईरान सरकार पर परमाणु विवाद शांतिपूर्ण तरीके से हल करने का दबाव बढ़ेगा। ईरान अगर अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने का फैसला करता है तो राजनयिक हल के लिए वार्ता के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

प्रस्ताव के मसौदे के अनुसार ईरान के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को प्रतिबंधित किया जाएगा। रिवोल्युशनरी गार्ड्स से संबंधित परमाणु कंपनियों की संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। यूरेनियम खनन जैसे क्षेत्रों में ईरानी निवेश प्रतिबंधित होगा और कई श्रेणियों के भारी हथियार भी वह नहीं खरीद सकेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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