शेखावत के निधन पर शीर्ष नेताओं ने शोक जताया
शेखावत का शनिवार को जयपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 86 साल के थे। गुरुवार को उन्हे बेचैनी और सांस लेने में हो रही तकलीफ की वजह से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। शेखावत को शानिवार सुबह 11 बजे के लगभग मृत घोषित किया गया। उनके परिवार में पत्नी सूरज कंवर और एक बेटी हैं। उनकी पत्नी और दामाद नरपत सिंह राजवी अस्पताल में उपस्थित थे।
राष्ट्रपति का शोक संदेश
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शेखावत की पत्नी सूरज कुंवर को लिखे शोक संदेश में कहा, "शेखावत एक ऐसे व्यक्तित्व के मालिक थे, जो गरीब से गरीब लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं को गहराई से समझते थे। जीवन के शुरुआती दिनों में अपने पिता की मृत्यु और परिवार को मदद करने के लिए पढ़ाई छोड़ने जैसे अनुभवों के परिणामस्वरूप उनमें आम आदमी की इच्छाओं समझने की शक्ति उत्पन्न हुई।"
उपराष्ट्रपति ने कहा
उपराष्ट्रपति अंसारी ने अपने संदेश में कहा कि लंबे समय तक राष्ट्र सेवा में योगदान के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा के प्रति सपर्मण, सेवा भावना और सादगी के लिए शेखावत को हमेशा जनता का स्नेह और आदर मिला।
मनमोहन सिंह बोले
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने शोक संदेश में कहा कि शेखावत राजस्थान के सबसे कद्दावर नेताओं में से थे। वह हमेशा सिद्धांतों के साथ आगे बढ़े। प्रधानमंत्री ने कहा, "भैरोसिंह शेखावत का शुरुआती जीवन कठिन रहा। बाद में उन्होंने पुलिस विभाग में नौकरी की।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "शेखावत जी एक करिश्माई नेता थे। उन्होंने कुछ अन्य नेताओं के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक युग को परिभाषित किया। उनमें कई गुण थे। उनका नजरिया उदार था। सामाजिक कार्यकर्ता और सार्वजनिक हस्ती के रूप में वह हमेशा अपने सिद्धांतों के साथ खड़े रहे।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भैरोसिंह शेखावत का ही साहस था कि उन्होंने 1982 के देवराला सती कांड का विरोध किया।
वाजपेयी ने कहा
पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत जब देश के उपराष्ट्रपति बने थे तब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा था कि 'मिट्टी की धूल माथे पर चंदन का तिलक बनकर उभरी है।' आज जबकि शेखावत इस दुनिया में नहीं रहे, तो उनके निधन पर वाजपेयी ने शोक जताते हुए कहा, 'आज वही चंदन का तिलक फिर से अपनी माटी में मिल गया।'
वाजपेयी ने शेखावत के निधन पर जारी अपने शोक संदेश में कहा, "वह पार्टी के जरूर थे मगर उनका व्यक्तिव और सम्पर्क दलगत सीमाओं से कहीं ऊपर था। सचमुच वह अजातशत्रु थे। धुर विरोधी भी उनसे अपने मन की बात खुलकर किया करते थे।"













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