गांवों में पहुंचेंगी शहरी सुविधाएं
प्रशांत सूद
नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए वहां शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार अब बड़े स्तर पर काम करने का मन बना रही है। सरकार इसके लिए निजी क्षेत्र के कारोबारी समूहों के सहयोग से गांवों में नई सुविधाओं को बढ़ावा दे रही है।
पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की ग्रामीण इलाकों में शहरी सुविधाओं के विकास की योजना (पुरा योजना) को अब निजी कारोबारियों से बेहतर सहयोग मिल रहा है। योजना के अंतर्गत पंचायतों के मंडल 10 साल की अवधि के लिए जीवन स्तर में सुधार, शहरी सुविधाओं के विकास और आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए चयनित निजी कारोबारी समूहों को सौंपे जाएंगे।
वर्तमान में 10 स्थानों पर चल रही प्रारूप योजना निजी भागीदारी से चल रही है। इस योजना से प्रभावित होकर करीब 93 उद्योग समूहों ने ग्रामीण विकास के कार्य में अपनी रुचि दिखाई है।
अनुमान है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय दिसंबर तक निजी समूहों का चयन करके जनवरी तक उनके साथ करार कर सकता है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अरविंद मायाराम ने आईएएनएस से कहा, "प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले मंत्रालय, प्रदेश सरकार और निजी भागीदार के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।"
चयनित भागीदार क्षेत्र में जल आपूर्ति, सीवेज, कचरा निस्तारण, स्ट्रीट लाइटिंग और दूरसंचार सेवाओं के विकास के अलावा कौशल विकास और आर्थिक विकास के कार्य करेंगे।
मंत्रालय का कहना है कि योजना का सीधा लाभ ग्रामीण इलाकों से बढ़ते पलायन को रोकने में मिलेगा।
वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, 1991 से 2001 के बीच कुल पलायन करने वाले लोगों की संख्या 9.8 करोड़ थी इसमें से 22 फीसदी लोगों ने गांवों से शहरों की ओर पलायन किया।
मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के विकास के लिए केवल धनराशि बढ़ाते जाने से इच्छित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं।
मायाराम ने कहा, "सरकार की आधारभूत सरचना में वृद्धि की योजना का लाभ एक बार में कभी गांवों तक नहीं पहुंचता है। सड़क के बाद पानी और पानी के बाद बिजली पहुंचने में कई वर्ष का अंतराल हो जाता है, इसके चलते विकास कार्यों का असर समाप्त हो जाता है।"
उन्होंने कहा कि हम प्रारूप योजना के निष्कर्षो के आधार पर निर्णय लेंगे इसके बाद 2012 तक यह योजना कोई अंतिम रूप ले सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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