कंजरवेटिव पार्टी ने शुरू की सरकार बनाने की कवायद
इस बीच, 29 फीसदी वोटों के साथ 258 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर पहुंची सत्ताधारी लेबर पार्टी के नेता व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है। वर्ष 1083 के बाद लेबर पार्टी को सबसे करारी चुनावी शिकस्त झेलनी पड़ी है। उन्होंने कहा है कि संविधान उन्हें प्रधानमंत्री बने रहने का अधिकार देता है। उन्होंने भी लिबरल डेमोक्रेट्स को लुभाने के लिए कैबिनेट में शामिल होने और चुनाव सुधार पर जनमत सर्वेक्षण कराने का प्रस्ताव दिया। गॉर्डन ने शुक्रवार को कहा था कि स्थाई सरकार सुनिश्चित करने के लिए वह लिबरल पार्टी से बात करेंगे।
लिबरल डेमोक्रेट्स के नेता निक क्लेग पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह पहले कंजरवेटिव पार्टी से बातचीत के लिए तैयार हैं क्योंकि वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है।
क्लेग के मुताबिक उनका हमेशा से विश्वास रहा है कि ज्यादा वोट और ज्यादा सीट पाने वाली पार्टी को सरकार बनाने का पहला मौका मिलना चाहिए।
ब्रिटेन के इतिहास में वर्ष 1974 के बाद से पहली बार त्रिशंकु संसद की तस्वीर उभरकर सामने आई है। वित्तीय बाजारों के सोमवार के खुलने से पहले सभी राजनीतिक दल सरकार बनाने को लेकर समझौता कर लेने के पक्ष में हैं। चुनावी नतीजों का असर लंदन स्टॉक मार्केट पर दिखने लगा था।
समाचार पत्र डेली मेल के मुताबिक कैमरन ने देर रात क्लेग से फोन पर बातचीत की और उनके समक्ष सरकार बनाने के सिलसिले में कैबिनेट में शामिल होने और चुनाव सुधार पर समिति बनाने का प्रस्ताव रखा।
उल्लेखनीय है कि आम चुनाव में मुख्य विपक्षी दल कंजरवेटिव पार्टी 307 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है लेकिन 20 सीटों से बहुमत से पीछे रह गई है जबकि सत्ताधारी लेबर पार्टी को भारी नुकसान झेलना पड़ा। उसे 258 सीटें हासिल हुई हैं। चुनावों में लिबरल डेमोक्रेटिक 'किंगमेकर' की भूमिका में उभरी है और उसे 57 सीटें मिली हैं।
कंजरवेटिव पार्टी को 36 फीसदी, लेबर पार्टी को 29 फीसदी और लिबरल डेमोक्रेट्स को 22.9 फीसदी मत प्राप्त हुए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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