गैस की क़ीमत सरकार तय करेगी

प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण को लेकर अंबानी बंधुओं में चल रही खींचतान पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि गैस का मूल्य का तय करने का अधिकार सिर्फ़ सरकार के पास है.
अदालत के इस निर्णय को मुकेश अंबानी के हक़ में माना जा रहा है क्योंकि सरकार जो भी मूल्य निर्धारित करेगी वह दोनों भाइयों के बीच हुए एक पारिवारिक समझौते से काफ़ी अधिक होगा.
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सज़ का मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से गैस ख़रीदने के लिए एक पारिवारिक समझौता हुआ था.
उस समझौते के मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनी को मुकेश अंबानी की कंपनी से 2.34 डॉलर प्रति मिलियन यूनिट के हिसाब से 17 साल तक प्राकृतिक गैस उपलब्ध करवाई जानी थी.
ये मूल्य 2006 में सरकार द्वारा निर्धारित 4.20 डॉलर प्रति मिलियन यूनिट से काफ़ी कम था.
रिलायंस नेचुरल रिसोर्सज़ के मालिक अनिल अंबानी ने सरकारी मूल्य को मानने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि उनका गैस के मूल्य को लेकर एक पारिवारिक समझौता है और वो उसी का पालन करेंगे.
अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि ये पारिवारिक समझौता तकनीकी और क़ानूनी तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को बाध्य नहीं करता.
कोर्ट ने साफ़ किया है कि प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण का अधिकार सिर्फ़ सरकार के पास है.
बातचीत
अदालत ने दोनों भाईयों से कहा है कि वे दोबारा बातचीत करके छह सप्ताह के भीतर किसी समझौते पहुँचें.
दरअसल मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में भारत के सबसे बड़े गैस भंडार की खोज की है जिससे भारत में प्राकृतिक गैस का उत्पादन क़रीब दोगुना हो सकता है.
उधर अनिल अंबानी उत्तर प्रदेश के दादरी में गैस पर आधारित पॉवर प्लांट स्थापित करना चाहते हैं जिसके लिए उन्होंने गैस ख़रीदने का एक पारिवारिक समझौता मुकेश अंबानी के साथ किया था.
सुनवाई के समय अदालत में मौजूद अनिल अंबानी फ़ैसले के तुरंत बाद पत्रकारों बात किए बिना चले गए.
फ़ैसला आने के तुरंत बाद शेयर बाज़ार पर दोनों कंपनियों के शेयरों पर उम्मीद के अनुसार ही असर पड़ा.
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयरों में कुछ तेज़ी देखी गई और रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज़ के शेयार भारी दबाव में आते हुए नीचे लुढ़क गए.












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