सज़ा सबूतों के आधार पर: चिदंबरम

मुंबई हमले के दोषी अजमल आमिर क़साब को अदालत की ओर से सज़ा सुनाए जाने पर भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि क़साब को सज़ा उनके इक़बाल-ए-जुर्म पर नहीं, बल्कि सबूतों के आधार पर दी गई है.
गुरुवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने क़साब को चार मामलों में मौत की सज़ा और पांच मामलों में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.
राज्यसभा में गृहमंत्रालय के काम करने के तौर-तरीक़ों पर हो रही चर्चा के जवाब में चिदंबरम ने कहा, "क़साब को सज़ा उनकी स्वीकारोक्ति पर नहीं, बल्कि उनके ख़िलाफ़ जुटाए गए सबूतों के आधार पर दी गई है."
उन्होंने कहा, "क़साब के ख़िलाफ़ न सिर्फ़ गवाह थे, बल्कि काफ़ी मशक़्क़त के बाद सबूतों के भंडार जुटाए गए थे. हम करांची से मुंबई आए हमलावरों के रास्ते की पहचान करने में कामयाब हुए. हमने हमलावरों के मोबाइल फ़ोन की बातचीत को हमले के एक घंटे के अंदर ही ट्रैक कर लिया था."
अदालती सुनवाई पर अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा, " हमने ग्वांतानामो बे नहीं बनाया, यहाँ कोई सैन्य अदालत भी नहीं है. क़साब की सुनवाई एक सामान्य अदालत में हुई है और इसके लिए सिर्फ़ एक विशेष जज को नियुक्त किया गया था."
चिदंबरम का कहना था कि उन्हें भारत की न्यायिक व्यवस्था पर गर्व है और उसके अनुसार क़साब की फांसी के फ़ैसले पर हाई कोर्ट की मुहर चाहिए और उसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी जा सकता है.
उनका कहना था कि मंबई हमले में अभियुक्त फ़हीम अंसारी और सबाहुद्दीन को अदालत ने बरी कर दिया है, लेकिन इस मामले को ऊँची अदालतों में चुनौती देने की घोषणा पहले ही हो चुकी है.
26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुम हमले में 166 लोग मारे गए थे जबकि 250 से अधिक घायल हुए थे.












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