ब्रिटेन में मतदान आज, त्रिशंकु संसद के आसार
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक राजनेता पूरे दम-खम के साथ मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करते दिखे। कंजरवेटिव पार्टी को डेविड कैमरून के नेतृत्व में 13 वर्ष बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद है जबकि लिबरल डेमोक्रेट नेता निक क्लेग की बढ़ती लोकप्रियता से कई राजनीतिक समीकरण गड़बड़ हो सकते हैं।
कैमरून अगर सत्ता में आते हैं तो वह प्रसिद्ध ईटन स्कूल से आने वाले 19वें प्रधानमंत्री होंगे। साथ ही अगर उनकी पार्टी को बहुमत हासिल हो जाता है तो 1945 के बाद कंजरवेटिव पार्टी के पक्ष में आया यह सबसे बड़ा चुनावी उलटफेर होगा।
यह पहला मौका है जब अमेरिका की तर्ज पर प्रधानमंत्री पद के तीनों उम्मीदवारों ने आमने-सामने लाइव टीवी बहस में हिस्सा लिया।
ब्राउन अगर दोबारा प्रधानमंत्री बनते हैं तो लेबर पार्टी लगातार चौथी बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लेबर पार्टी की लोकप्रियता में उतार का दौर है और ब्रिटिश प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन के लिए सत्ता में वापस लौटना आसान नहीं होगा। यही नहीं भारतीय मूल के लेबर उम्मीदवार मनीष सूद ने ब्राउन को अब तक का सबसे खराब प्रधानमंत्री घोषित कर दिया।
हाउस ऑफ कामन्स की 650 सीटों के लिए करीब 4.5 करोड़ वैध मतदाता हैं।
कैमरून ने बुधवार को कहा कि चुनाव में बहुत नजदीकी मुकाबला है। उन्होंने आव्रजकों की सीमा तय करने का वादा किया है जिसका सीधा असर एशियाई, अफ्रीकन और कैरेबियाई आव्रजकों पर पड़ेगा।
त्रिशंकु संसद के आसार :
यदि चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के आकलन सटीक बैठे तो ब्रिटेन में इस बार संसद त्रिशंकु रहेगी। यूगव/सन के सर्वेक्षण के मुताबिक कंजरवेटिव पार्टी को 35 फीसदी, लेबर को 30 और लिबरल डेमोक्रेट्स को 24 फीसदी मत मिलने की संभावना है।
'द इंडिपेंडेंड' और 'आईटीवी' के ताजा सर्वेक्षणों में कंजरवेटिव पार्टी को 37 फीसदी, लेबर को 29 फीसदी और लिबरल डेमोक्रेट्स को 26 फीसदी मत मिलने के आसार हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हाल के दशकों का यह सबसे नजदीकी चुनावी मुकाबला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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