..तो भारत के लिए दुस्वपन बन गया 'तंगहाल' कसाब

26 नवंबर, 2008 को मुंबई में रक्तपात मचाने वाले कसाब की पैदाइश वर्ष 1987 में पाकिस्तान के ओकारा जिले के फरीदकोट में हुई थी। बदहाली में बचपन बसर करने वाले कसाब ने बाद में लाहौर का रुख किया और यहीं से उसके आतंक का सफर भी शुरू हो गया।

अमूमन हर गरीब की तरह वह भी अमीर बनने की चाह रखता था और उसकी यही चाहत पाकिस्तान में बैठे दशहतगर्दी के आकाओं को मालूम पड़ गई। भारत में दहशत फैलाने की साजिश रचने वालों ने कसाब को रकम के बदले गोला-बारुद पर खड़ा कर दिया। उसे कई दौर के प्रशिक्षण दिए गए।

आतंक का प्रशिक्षण पूरा हुआ तो कसाब के आकाओं ने उसे भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई को दहलाने की जिम्मेदारी सौंप दी। यह जिम्मेदारी उसके साथ ही अन्य नौ पाकिस्तानी युवकों के कंधों पर डाली गई थी और इन लोगों ने एक दिन मुंबई को निशाना बना दिया।

भारत में इन 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों में नौ सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए जबकि कसाब जिंदा पकड़ा गया। इस पाकिस्तानी आतंकी ने शायद ही कभी सोचा होगा उसका देश उसे इस तरह भूल जाएगा जहां उसने अपने जिदंगी के दो दशक से लंबा वक्त गुजार दिया था। पाक सरकार पहले तो उसे अपना बाशिंदा मानने से इंकार कर दिया लेकिन सच्चाई सबके सामने आ गई।

अब कसाब को अदालत भी दोषी मान चुकी है और उसे सजा सुनाई जानी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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