मालवा में बढ़ रहा कट्टरवादियों का आधार
समझौता एक्सप्रेस का बम धमाका हो या वाराणसी में विस्फोट, इन सभी घटनाओं के तार इंदौर से जुड़े पाए गए। यह क्षेत्र स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) का गढ़ भी रहा है। सिमी के सफदर नागौरी से लेकर कई अन्य लोगों ने न केवल इस इलाके में लम्बे समय तक रहकर साजिशें रचीं बल्कि उन्हें अंजाम भी दिया।
इसके बाद मालेगांव बम धमाकों के तार भी मालवा से ही जुड़े पाए गए और कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं। अजमेर शरीफ दरगाह में वर्ष 2007 में हुए धमाकों के तार भी यहां से जुड़े होने का अब नया खुलासा हुआ है।
आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों के तार मालवा इलाके से जुड़े होने से एक बात तो साफ हो चली है कि इस क्षेत्र में आतंकी गतिविधि भले न हो रही हों, मगर उनका संचालन यहां से अवश्य हो रहा है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मालवा क्षेत्र के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रवीण काबरा ने आईएएनएस से चर्चा में स्वीकार कि इस इलाके में रहकर लोग साजिशें रचते हैं। इस स्थिति से वह प्रशासन को भी अवगत करा चुके हैं। अजमेर धमाकों से जुड़े जो लोग पकड़े गए हैं उनका संघ से कोई लेना देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब भी कोई हिंदू पकड़ा जाता है तो लोग उसे संघ का आदमी बताने लगते हैं। तुष्टिकरण के सहारे वोट हासिल करने की इच्छा के कारण ऐसा किया जाता है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुस्लिम त्योहार कमेटी के अध्यक्ष शाहमीरी खुर्रम का मानना है कि देशद्रोही गतिविधियों मे शामिल लोगों को मालवा में सहूलियतें मिलती होंगी इसीलिए यह क्षेत्र उनके लिए पनाहगाह बन गया है। जिस तरह डाकू चंबल के इलाके में आसानी से अपनी गतिविधियां चलाते हैं, ठीक वैसे ही मालवा में साजिशें रचने वाले पनप ले रहे हैं। यह सब कुछ पुलिस की मिली-भगत से हो रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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