नेपाल के माओवादियों ने भारत पर साधा निशाना (लीड-1)
प्रचंड ने कहा, "प्रधानमंत्री ने थिम्पू से लौटने के बाद ही माओवादियों को दबाने के लिए सेना बहाल करने की बात करनी आरंभ कर दी है।" ज्ञात हो कि भूटान की राजधानी थिम्पू में 16वें दक्षेस सम्मेलन के इतर नेपाली प्रधानमंत्री और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।
इसके बाद नेपाल में एक बयान जारी कर कहा गया था कि मनमोहन सिंह ने विश्वास जताया है कि नेपाल में वर्तमान सरकार के नेतृत्व में नए संविधान तैयार होगा। इससे भड़के माओवादियों ने नेपाल की गठबंधन सरकार को भारत की 'कठपुतली' करार दिया था।
प्रचंड ने वर्तमान नेपाल सरकार में शामिल दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इनमें माफिया, दलालों और भ्रष्टों की भरमार है।
उन्होंने कहा कि भारत के साथ संबंध समानता पर आधारित और द्विपक्षीय होने चाहिए। "विदेशी ताकतों के समक्ष झुकने का दौर अब खत्म हो चुका है।"
उल्लेखनीय है कि नेपाल में माओवादियों की रैलियों में भारत के खिलाफ जमकर आग उगले जा रहे हैं। इस संदर्भ में नेपाल में भारत के राजदू राकेश सूद ने माओवादी नेताओं से भेंट पर इस पर चिंता भी जताई थी।
माओवादियों के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया था। काठमांडू में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 15,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।
इस बीच, प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे राष्ट्र को संबोधित किया और माओवादियों से हड़ताल स्थगित करने और वार्ता के लिए आगे आने का आग्रह किया।
अपने इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए नेपाल ने कहा कि उनकी सरकार के पास संसद में बहुमत है। उन्होंने माओवादियों पर खुद को सत्ता से बेदखल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
माओवादी देश में नई सरकार की गठन की मांग कर रहे हैं। माओवादियों की हड़ताल की वजह से काठमांडू में सभी व्यापारिक और शैक्षणिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बंद का असर यातायात सेवा पर भी देखा गया।
प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव अजय छिब्बर और कैरेन लैंडग्रेन से मुलाकात की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों से कहा है कि उन्हें इस बात की आशंका है कि मई दिवस पर माओवादी हिंसक घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications