फिर सांस ले रही है सुकना झील

जयदीप सरीन

चण्डीगढ़, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। गाद की समस्या का सामना कर रही प्रसिद्ध सुकना झील अब फिर अपने पुराने रूप में जीवंत होने जा रही है। अधिकारियों द्वारा झील से गाद हटाकर इसे फिर खूबसूरत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

निचले हिमालय की सुरम्य कसौली पहाड़ियों के बीच बसी सुकना झील को 1958 में चण्डीगढ़ की योजना बनाने वाले वास्तुकार ली कॉबूजीयर और उनके दल ने नियोजित किया था।

वर्षो से इस झील की लगातार खराब होती हालत चिंता का विषय बनी हुई थी। इस सप्ताह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चण्डीगढ़ के अधिकारियों की झील की सफाई करने का आदेश दिया है।

अदालत झील की सफाई पर नजर रखे हुए है और प्रशासन मानसून की शुरुआत से पहले झील से गाद हटाने के काम को पूरा कर लेना चाहता है। अधिकारियों ने अब गाद साफ करने के अपने लक्ष्य को 50 लाख घन फुट से बढ़ाकर 80 लाख घन फुट कर लिया है।

झील में नया बना 15-20 एकड़ का गाद क्षेत्र पानी के कम होते जल स्तर की शुरुआत को दिखाता है। सुकना झील पर बना नया गाद क्षेत्र बताता है कि मनुष्य निर्मित झीलों का वास्तविक आकार सूख कर कम होने लगा है।

अभियांत्रिकी विभाग ने इस महीने गाद को दूर करने के गंभीर प्रयास करते हुए इसके लिए मशीनों और उपकरणों का उपयोग शुरू किया है। करीब 10 लाख घन फुट गाद को पहले ही निकाला जा चुका है।

चण्डीगढ़ के अभियांत्रिकी सचिव संजय कुमार ने बताया, "हमने गाद हटाने के लिए कई मशीनों, ट्रकों और ट्रेक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल किया है। हमें उम्मीद है कि मानसून शुरु होने से पहले हम अपना लक्ष्य पूरा कर लेंगे।"

वर्ष 2009 में झील से 7.75 लाख घन फुट गाद हटाई गई थी। वर्ष 2008 में 2.14 लाख घन फुट और 2007 में 0.67 लाख घन फुट ही गाद हटाई गई थी।

सुकना झील चण्डीगढ़ एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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