चिदंबरम पर दिए बयान पर दिग्विजय ने जताया खेद
लखनऊ में संवाददाताओं से बाचतीच में दिग्विजय ने कहा, "चिदंबरम से मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं। अभी भी हमारी अच्छी दोस्ती है। दुर्भाग्य से सरकार और पार्टी को इस मुद्दे पर शर्मिदगी का सामना करना पड़ा। मुझ्झे इसका खेद है।"
सिंह ने हाल ही में एक अखबार में चिदंबरम को बुद्धिमान और प्रतिबद्ध बताने के साथ-साथ उन्हें अभिमानी मंत्री भी कहा था। साथ ही उन्होंने उनकी नक्सल नीति की भी आलोचना की थी।
अपने बयान के बारे में सफाई देते हुए सिंह ने कहा, "मैंने नक्सलियों से निपटने में नाकाम रही छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और भाजपा नेताओं व नक्सलियों के गठजोड़ के बारे में लिखा था। विडंबना है कि चिदंबरम को लेकर मेरी टिप्पणी को विवादास्पद रूप में पेश की गई। इसका मुझे खेद है।"
सिंह ने इस दौरान जेल में बंद नक्सली विचारक तुषारकांत भट्टाचार्य से किसी भी तरह की बातचीत से साफ इंकार किया।
सिंह ने कहा, "मैं तुषारकांत के बारे में जानता हूं। यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है, मैं इस पर कोई बात नहीं करना चाहता।"
मालूम हो कि तुषारकांत भट्टाचार्य ने एक अंग्रेजी पत्रिका से बातचीत में दावा किया था कि पिछले साल अगस्त में दिग्विजय सिंह ने हैदराबाद के एक कांग्रेस नेता के माध्यम में उससे संपर्क किया था। उस दौरान वह आंध्र प्रदेश के वारंगल जेल में बंद था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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