नेताओं ने मानी दक्षेस की विफलता (राउंडअप)
थिंपू, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षेस के 16वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठा हुए दक्षिण एशियाई देशों के प्रमुखों ने स्वीकार किया है कि द्विपक्षीय विवादों विशेषकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण यह संगठन अपने उद्देश्य को हासिल करने में विफल साबित हुआ है।
दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (दक्षेस) के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की शुरुआत के मौके पर आठों सदस्य देशों के प्रमुखों ने दक्षिण एशिया में संपर्क बढ़ाने और सशक्तिकरण पर जोर दिया।
सम्मेलन की पहली बार मेजबानी कर रहे हिमालयी देश भूटान के प्रधानमंत्री लियोंचेन जिग्मी थिंले ने कहा कि संगठन को अब अपने 25 वर्ष के सफर का विश्लेषण करना चाहिए।
थिंले ने कहा, "दक्षेस के सफर को एक असाधारण सफलता के रूप में नहीं देखा जा सकता।" दक्षेस की स्थाना वर्ष 1985 में साझा विरासत वाले दक्षिण एशिया के देशों में गरीबी उन्मूलन और विकास के लिए किया गया था।
उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच आपसी विवाद के कारण संगठन अपने उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा, "झगड़ालू पड़ोसी एक समृद्ध समुदाय की स्थापना नहीं कर सकते।"
सम्मेलन में भूटान के प्रधानमंत्री के अलावा भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मशीद भाग ले रहे हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी माना कि दक्षेस अपने उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहा है।
सिंह ने दक्षेस के 25 वर्षो के समय को आधा भरा गिलास बताते हुए दक्षिण एशिया के नेताओं को चेतावनी दी कि बेहतर संचार और सशक्तिकरण नहीं होने पर दुनिया की एक चौथाई आबादी के सामने हाशिए पर जाने और ठहराव का खतरा पैदा हो सकता है।
दक्षेस के 16वें शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, "दक्षेस के ढाई दशक के समय को देखते हुए हम दावा कर सकते हैं कि गिलास आधा भरा हुआ है और खुद को बधाई दे सकते हैं या हम स्वीकार कर सकते हैं कि गिलास आधा खाली है और हमारे सामने चुनौतियां हैं।"
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि हमें क्षेत्रीय सहयोग, क्षेत्रीय विकास और क्षेत्रीय एकता के गिलास को आधा खाली स्वीकार कर अपने सामने चुनौती रखनी चाहिए।"
बेहतर क्षेत्रीय सहयोग की वकालत करते हुए सिंह ने 'संपूर्ण दक्षिण एशिया के विकास के बारे में अपने दृष्टिकोण' के बारे में चर्चा की।
इसके बाद मालदीव के राष्ट्रपति नशीद ने खुले तौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की चर्चा की।
उन्होंने मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बीच होने वाली बैठक का जिक्र करते हुए दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने की आशा जताई।
गिलानी ने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया के विकास के लिए शांति जरूरी है।
उन्होंने क्षेत्र की स्थिरता को पाकिस्तान की वरीयता क्रम में सबसे ऊपर बताते हुए कहा कि आतंकवाद एक क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समस्या बन गया है जो दक्षिण एशिया को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है। दक्षेस के देशों को इस समस्या से एकजुट होकर निपटना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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