विपक्ष में बिखराव, मायावती ने कराई संप्रग की जीत (राउंडअप)
एक दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वैसे साफ कर दिया था कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। लेकिन संप्रग सरकार विपक्ष को तभी पराजित कर पाई, जब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उसे विधायी समर्थन दिया और समाजवादी पार्टी (सपा) तथा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने लोकसभा से बहिर्गमन किया। परिणामस्वरूप जीत का पलड़ा सत्ताधारी गठबंधन की ओर झुक गया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथियों द्वारा पेश किए गए कटौती प्रस्ताव पर मतदान के बाद कांग्रेस प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने कहा, "सरकार ने साबित कर दिया है कि लोकसभा में उसे बहुमत प्राप्त है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वामपंथियों ने भाजपा के साथ मतदान किया।"
अधिकांश कटौती प्रस्ताव दो मंत्रालयों के बजटीय मांगों पर लाए गए थे। इनमें पेट्रोलियम और उर्वरक मंत्रालय शामिल हैं। इन कटौती प्रस्तावों के जरिए ईंधन और उर्वरकों की कीमतों में प्रस्तावित वृद्धि पर असहमति व्यक्त की गई थी। विपक्ष का कहना है कि इससे खाद्य और जरूरी उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में और वृद्धि होगी।
मंगलवार को दिन चढ़ने के साथ ही उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती द्वारा कटौती प्रस्ताव पर सरकार के पक्ष में मतदान करने की घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो चला था कि विपक्ष का जीत का सपना धूलधूसरित हो चुका है।
लालू प्रसाद और मुलायम सिंह ने सरकार की जीत को और पुख्ता बना दिया। लालू ने कहा कि वह भाजपा के साथ मतदान नहीं करेंगे तो मुलायम ने सरकार के खिलाफ वोट न देने की घोषणा की और दोनों नेता मतदान से पहले ही अपने सदस्यों सहित लोकसभा से वाकआउट कर गए। लोकसभा में सपा के 24 और राजद के तीन सांसद हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने अपनी निराशा छुपाते हुए कहा कि विपक्ष ने अपना उद्देश्य साबित कर दिया है। उन्होंने कहा, "कटौती प्रस्ताव लाने का मकसद पेट्रोल, डीजल और उर्वरक की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाना था। सरकार को अस्थिर करने का मकसद नहीं था। इस तरह से सदन के अंदर और सदन के बाहर, दोनों जगह हम सरकार पर दबाव बनाने में सफल साबित हुए हैं।"
लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज द्वारा लाए गए पहले कटौती प्रस्ताव पर मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 162 और विपक्ष में 246 वोट पड़े।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता गुरुदास दासगुप्ता द्वारा लाया गया दूसरा कटौती प्रस्ताव भी गिरा गया। प्रस्ताव के पक्ष में 201 और विपक्ष में 289 मत पड़े।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने मंगलवार शाम छह बजे सदन की कार्यवाही पुन: शुरू होने के बाद सदस्यों को कटौती प्रस्ताव पेश करने की अनुमति दी।
इसके पहले मायावती ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "केंद्र सरकार की गलत नीतियों से बढ़ी कमरतोड़ महंगाई को देखते हुए बसपा को संप्रग सरकार के खिलाफ मतदान करना चाहिए था लेकिन हमारी पार्टी यह नहीं चाहती कि महंगाई के मुद्दे की आड़ में सांप्रदायिक ताकतें सत्ता में वापस आ जाएं।"
बसपा अध्यक्ष ने कहा, "सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में आने से रोकने के लिए बसपा कटौती प्रस्ताव के मसले पर केंद्र सरकार का समर्थन करेगी। हमारी पार्टी मतदान का बहिष्कार करेगी। इस बाबत पार्टी के सभी सांसदों को अवगत करा दिया गया है।"
इस दौरान मायावती ने यह भी सफाई दी कि पार्टी के इस फैसले को उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति मामले में चल रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच से जोड़कर न देखा जाए।
दूसरी ओर संप्रग सरकार की आर्थिक नीतियों और बढ़ती महंगाई के खिलाफ बीजू जनता दल (बीजद), तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) सहित 13 दलों के गठबंधन ने मंगलवार को भारत बंद का आह्वान कर रखा था। लेकिन संसद के अंदर की तरह संसद भवन परिसर में प्रदर्शन के दौरान इन दलों के बीच का विभाजन साफ दिखाई दे रहा है। चारों वामदलों, बीजद और एआईएडीमके के सांसद जहां मुख्य द्वार पर धरने पर बैठे, वहीं सपा, राजद और तेदेपा के सांसद महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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