दक्षेस सम्मेलन में मनमोहन-गिलानी पर टिकेगी नजरें (लीड-1)
थिम्पू, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) सम्मेलन में सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि भारत और पाकिस्तान के बीच के विवाद का साया यहां फिर दिखाई देता है या नहीं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी थिम्पू पहुंच चुके हैं और मनमोहन सिंह के साथ उनकी मुलाकात की अटकलें जोरों पर हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य से भरे छोटे से हिमालयी देश भूटान की राजधानी थिम्पू को पहली बार दक्षेस शिखर सम्मेलन की मेजबानी मिली है।
दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी शिखर सम्मेलन से इतर दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच मुलाकात की योजना की पुष्टि या खंडन नहीं कर रहे हैं।
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने मंगलवार को पाकिस्तानी के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से दक्षेस जलवायु प्रदर्शनी स्थल पर मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और एक दूसरे का हाल-चाल पूछा। भारतीय अधिकारियों ने इसे साधारण शिष्टाचार बताया।
दक्षेस के बुधवार से आरंभ हो रहे 16वें शिखर सम्मेलन की कार्यसूची में व्यापार और जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दे शीर्ष पर रहने की उम्मीद है।
दक्षेस के रजत जयंती वर्ष में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के दौरान पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और व्यापार सहयोग बढ़ाने के संबंध में तीन समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे।
शिखर सम्मेलन के लिए पूरे शहर को बैनरों और आठों सदस्य देशों के झंडों से सजाया गया है।
दुनिया के सबसे हरित देश भूटान के पर्यावरण संरक्षण की नीति के अनुसार 'खुशहाल और हरित दक्षिण एशिया' की घोषणा सामने आ सकती है। भूटान का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा वनों से घिरा है।
जलवायु परिवर्तन, तटीय क्षेत्र प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय प्रभाव के आंकलन अध्ययन के क्षेत्रों में ज्ञान और तकनीकी के विनिमय, क्षमता निर्माण और पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी के हस्तातंरण में सहयोग बढ़ाने के लिए दक्षेस सदस्य देश पर्यावरण समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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