बसपा कटौती प्रस्ताव पर संप्रग के साथ : मायावती (लीड-1)
लखनऊ में मंगलवार को अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन में मायावती ने कहा, "केंद्र सरकार की गलत नीतियों से बढ़ी कमरतोड़ महंगाई को देखते हुए बसपा को संप्रग सरकार के खिलाफ मतदान करना चाहिए था लेकिन हमारी पार्टी यह नहीं चाहती है कि महंगाई के मुद्दे की आड़ में सांप्रदायिक ताकतें सत्ता में वापस आ जाएं।"
बसपा अध्यक्ष ने कहा, "सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में आने से रोकने के लिए बसपा कटौती प्रस्ताव के मसले पर केंद्र सरकार का समर्थन करेगी। हमारी पार्टी मतदान का बहिष्कार करेगी। इस बाबत पार्टी के सभी सांसदों को अवगत करा दिया गया है।"
इस दौरान मायावती ने यह भी सफाई दी कि पार्टी के इस फैसले को उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति मामले में चल रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच से जोड़कर न देखा जाए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि महंगाई, पेट्रोलियम पदार्थो में मूल्य वृद्धि व जनता से जुड़े अन्य मुद्दों पर उनकी पार्टी पूर्व की भांति केंद्र सरकार के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेगी।
महंगाई के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार करार देते हुए मायावती ने कांग्रेस पार्टी को अपनी आर्थिक नीतियों में परिवर्तन लाने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा, "दुनिया के दूसरे देशों में महंगाई की दर एक से चार प्रतिशत है, लेकिन हमारे देश में यह 18 फीसदी है। केंद्र सरकार को देश की जनता को इसका जवाब देना होगा।"
उन्होंने कहा कि देश में आम आदमी को तभी राहत मिल सकेगी जब इस देश की आर्थिकि नीतियों को तैयार करते समय नीति बनाने वाले सर्वसमाज के गरीब और दबे-कुचले लोगों को ध्यान में रखेंगे। आजकल देश में नीतियां पूंजीपतियों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
मायावती ने कहा, " पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार की नीतियां जन विरोधी हैं। केवल पेट्रोलियम कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार आम जनता के हितों की अनदेखी करती रही है। महंगाई बढ़ने का यह एक बड़ा कारण रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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