उप्र में बिजली को लेकर हाहाकार
लखनऊ, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में बढ़ते पारे के साथ ही बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मचना शुरू हो गया है। बिजली की समस्या को लेकर विभिन्न जिलों में धरने और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
बिजली की समस्या से निपटने में नाकाम बिजली विभाग के अधिकारियों ने साफतौर पर यह कह दिया है कि अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था किए बिना समस्या का हल नहीं हो सकता। राज्य सरकार रोजाना केंद्रीय ग्रिड से अपने कोटे से अधिक बिजली लेने के बाद भी मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पा रही है।
राज्य सरकार ने मई-जून के लिये हिमाचल प्रदेश से 300 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली का ही इंतजाम किया है।
राज्य के बिजली कर्मचारी यूनियन के वरिष्ठ नेता शैलेंद्र दुबे ने रविवार को आईएएनएस को बताया कि उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग करीब 8,500 मेगावाट तक रहती है। गर्मी व कृषि सत्र में यह बढकर 9,000-9,500 मेगावाट तक पहुंच जाती है।
दूबे ने कहा कि राज्य सरकार के सभी ताप और पनिबजली घरों से हर रोज करीब 3,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। केंद्रीय पूल से 3500 मेगावाट बिजली का आयात करने के बाद प्रदेश में बिजली की कुल उपलब्धता करीब 6500 मेगावाट ही हो पाती है।
उप्र पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नवनीत सहगल ने कहा कि बिजली संकट से निपटने के लिए यूपीपीसीएल द्वारा हर संभव प्रयत्न किये जा रहे हैं। मई जून में हिमाचल प्रदेश से 300 मेगावाट बिजली मिलने के साथ ही इस सत्र में हमारे यहां बिजली उपलब्धता में लगभग 850 मेगावाट की बढोतरी हो जाएगी।
सहगल के मुताबिक शाहजहांपुर जिले में स्थित रिलायंस पावर परियोजना की पहली इकाई से 300 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है, जबकि 300 मेगावाट की दूसरी इकाई भी जल्द ही बिजली का उत्पादन शुरू कर देगी। इनके अलावा परीछा संयंत्र में 250 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी मई 2010 से शुरू हो जाएगा। बिजली खरीदने के लिए अन्य राज्यों से बात चल रही है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के ललितपुर में 1980 मेगावाट के ताप बिजली घर लगाने के बजाज हिंदुस्तान लिमिटेड के साथ प्रस्ताव को मंजूरी दे दी हैं। इस बिजलीघर से 2014 तक बिजली का उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा बजाज हिंदुस्तान लिमिटेड द्वारा कुल 450 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता वाली पांच परियोजनाओं की स्थापना करने के प्रस्ताव को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दी है। प्रत्येक परियोजना की उत्पादन क्षमता 90 मेगावॉट होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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