दिग्विजय ने की फोन टेपिग की जांच की मांग (लीड-2)

सिंह ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मुझे विश्वास नहीं होता कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ऐसा अनैतिक काम कर सकती है। लेकिन चूंकि जब ऐसी रिपोर्ट आई है तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "यदि किसी व्यक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है तो वैसे में उसका फोन टेपिंग कराना इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के मुताबिक गैरकानूनी है।"

उधर, भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने आईएएनएस से कहा कि पार्टी सोमवार को संसद में इस मुद्दे को उठाएगी।

उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। इसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। यह घटना इशारा करती है कि कांग्रेस आपातकाल के दिनों की ओर लौट रही है।"

सीतारमण आउटलुक पत्रिका की उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दे रही थीं, जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, माकपा नेता प्रकाश करात और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के फोन कॉल्स टेप किए थे।

माकपा ने भी एक बयान जारी कर कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर संसद में स्पष्टीकरण देना चाहिए।

पार्टी ने कहा कि केंद्र सरकार को चार बड़े नेताओं के फोन टेपिंग की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस संबंध में कथित आदेश देने वाले के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

पार्टी ने बयान में कहा, "सरकार को फोन टेपिंग मामले की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और जिसने इसके लिए आदेश दिया था, उसके खिलाफ वह कार्रवाई करे। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की गुप्त गतिविधियों के बचाव का बहाना नहीं बनाया जा सकता।"

माकपा ने कहा, "यह रिपोर्ट दर्शाती है कि सरकार खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य से विपक्षी दलों के नेताओं और अपने सहयोगी दलों के नेताओं पर नजर रखने के लिए कर रही है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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