मनमोहन, ओबामा ने की हेडली, आतंकवाद पर चर्चा (लीड-2)
वाशिंगटन, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ रविवार की मुलाकात में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी मूल के संदिग्ध आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली और सीमापार आतंकवाद के खतरे का मसला उठाया। दोनों नेताओं ने इनके अलावा अफगानिस्तान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
इस मुलाकात में ओबामा ने भारत को भरोसा दिलाया है अमेरिका सीमापार आतंकवाद और इससे जुड़ी भारत की चिंताओं पर पाकिस्तान से बात कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ के लिए भारतीय आग्रह पर भी पूरे सहयोग का विश्वास दिलाया।
प्रधानमंत्री ने ओबामा को बताया कि पाकिस्तान मुंबई हमले के गुनाहगारों को सजा दिलाने का जरा भी इच्छुक नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान की धरती से पनपने वाले आतंकवाद से निपटने की बात भी कही।
ओबामा और मनमोहन की मुलाकात के बाद भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने संवादाताओं से कहा, "पाकिस्तान मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करने का जरा भी इच्छुक नहीं है।"
राव के अनुसार प्रधानमंत्री ने ओबामा से कहा, "हमारे क्षेत्र में आतंकवाद का खतरा है और अगर यह जारी रहता है तो हमारी प्रगति पर इसका असर पड़ सकता है। इस खतरे से कैसे निपटा जाता है, इस पर दक्षिण एशिया का भविष्य निर्भर करेगा।"
ओबामा ने प्रधानमंत्री सिंह को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी संगठन लश्कर-तैयबा से जुड़े हेडली से पूछताछ के लिए भारत के आग्रह का वह 'पूरा समर्थन' करते हैं। हेडली इन दिनों अमेरिकी हिरासत में है।
ओबामा ने हेडली मसले पर सकारात्मक भरोसा दिलाया हालांकि उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि कानूनी प्रक्रिया की वजह से पूछताछ में अभी वक्त लग सकता है। राव ने बताया, "हेडली से पूछताछ की हमारी मांग के प्रति अमेरिकी का रुख पूरी तरह सहयोगात्मक है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी इस संबंध में कार्रवाई कर रहे हैं।"
हेडली मुंबई हमलों का प्रमुख आरोपी है और वह इस बारे में अपने गुनाह अमेरिकी अदालत के समक्ष स्वीकार कर चुका है।
ओबामा के साथ 45 मिनट तक चली मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री सिंह ने हेडली और पाकिस्तान का का मसला प्रमुख रूप से उठाया। दोनों नेताओं के बीच यहां के ब्लेयर हाउस में मुलाकात हुई। ब्लेयर हाउस अमेरिकी राष्ट्रपति का अतिथि गृह है।
वार्ता में शरीक हुए भारत के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, विदेश सचिव निरूपमा राव, अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। अमेरिकी शिष्टमंडल में विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेम्स जोन्स, दक्षिण एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय मुद्दों पर नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच किसी भी तरह के मतभेद से इंकार करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में भारत द्वारा चलाया जा रहा विकास कार्य सराहनीय है। ओबामा ने सिंह से मुलाकात के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की मिलने वाली सैन्य मदद की कड़ाई से निगरानी करेगा।
भारतीय विदेश सचिव राव ने कहा, "दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय मसलों पर कोई मतभेद नहीं है। अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए भारत के योगदान और त्याग की ओबामा ने सराहना की।"
राव के मुताबिक ओबामा ने प्रधानमंत्री सिंह से कहा, "पाकिस्तानी को दी जानी सैन्य सहायता की निगरानी की जा रही है और भारत के हित के मद्देनजर इस पर निगरानी जारी रहेगी।"
दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की। ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंधों को लगाने पर ओबामा ने भारत के सहयोग लेने की कोशिश की। इस मसले पर प्रधानमंत्री ने संतुलित रुख दिखाते हुए कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है लेकिन इसका हल वार्ता और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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