खालिदा जिया के वकीलों ने न्यायाधीशों को धमकी दी
समाचार पत्र डेली स्टार ने खबर दी है कि अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए न्यायाधीशों ने रविवार को मजबूरन मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। मामला खालिदा द्वारा अनधिकृत रूप से कब्जाए गए एक घर को लेकर था। यह घर ढाका कैंटोनमेंट में स्थित है और खालिदा इसमें लगभग 30 वर्षो से रह रही हैं। माना जा रहा है कि ये कनिष्ठ वकील बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से संबंधित थे। इन वकीलों का कहना है कि उन्हें अदालत से अपने मुवक्किल को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।
खालिदा को यह घर सरकार द्वारा 1982 में उनके पति, पूर्व राष्ट्रति दिवंगत जियाउर रहमान के सम्मान में आवंटित किया गया था। लेकिन वर्तमान सरकार का कहना है कि खालिदा ने मकान का गलत तरीके से आवंटन कराया था। प्रधानमंत्री हसीना ने खालिदा से सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह उस मकान को खाली कर दें।
न्यायाधीशों ने खालिदा की ओर से प्रस्तुत हो रहे वरिष्ठ वकीलों से आग्रह किया कि वे कनिष्ठ वकीलों को शांत कराएं या उनसे यहां से चले जाने को कहें। वरिष्ठ वकीलों में पूर्व मंत्री मौदूद अहमद भी शामिल थे। कनिष्ठ वकीलों की संख्या 100 थी।
लेकिन अहमद ने कहा कि उच्च न्यायालय में चल रहा यह मामला राजनीतिक है और जनता के सदस्य के रूप में वकीलों को यहां उपस्थित रहने का अधिकार है।
नारेबाजी कर रहे वकीलों ने दो न्यायाधीशों, मोहम्मद ईमान अली और ओबैदुल हसन को अवामी लीग का एजेंट कहा।
जब न्यायाधीशों ने पुलिस बुलाने की धमकी दी तो वकीलों ने कहा कि वे गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हैं। बाद में वरिष्ठ वकीलों के समझाने पर कनिष्ठ वकील राजनीतिक नारेबाजी करते हुए अदालत परिसर से बाहर चले गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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