वन्यजीव अभयारण्यों में जल संकट गहराया
अभयारण्यों की बड़ी संख्या होने की वजह यह स्थान घरेलू और विदेशी पर्यटकों को काफी रास आता है जिससे पर्यटन उद्योग को काफी फायदा होता है। राज्य में पशु अधिकार कार्यकर्ता वन विभाग की योजनाओं से संतुष्ट नहीं हैं। वन विभाग की योजनाओं के मुताबिक टैंकरों और ट्यूबेलों के माध्यम से अभयारण्यों में जलापूर्ति की जाती है।
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राज्य में पीपुल फार एनीमल (पीएफए) के प्रमुख बाबूलाल जाजू ने आईएएनएस को बताया, "कुछ संरक्षित वन्यजीव अभयारण्य और पार्क गर्मियों में पानी के संकट का सामना कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से कुछ ही उपाय अपनाए गए थे। राज्य में चलने वाली गरम हवाओं की वजह से छोटे जलाशय पानी के लिए तरस रहे हैं जबकि बाकी सूख चूके हैं।
लक्ष्मीपुर गांव के एक निवासी नानूराम बताते हैं कि पानी की तालाश में जंगली जानवरों के गावों में आने से हम हमेशा खतरे में रहते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में जंगली जानवरों के घुसने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। हाल में ही में अभयारण्य के समीप भोजीपुर गांव में घुसे चीते को मार दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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