चौदह बीमा कंपनियों पर पाबंदी

भारत में शेयर बाज़ार की नियामक संस्था सेबी ने ये आदेश शुक्रवार की रात जारी किया. सेबी का कहना है कि निजी बीमा कंपनियों को यूलिप शुरू करने के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट लेना ज़रूरी है. क्योंकि इन निजी कंपनियों ने ऐसा नहीं किया लिहाजा सेबी ने इन कंपनियों पर यूलिप के लिए लोगों से पैसा लेने पर तत्काल रोक लगा दी है.
सेबी ने जिन कंपनियों पर रोक लगाई है उनमें अवीवा लाइफ़ इंश्योरेंस, बजाज अलियांज़ लाइफ़ इंश्योरेंस, भारती एएक्सए लाइफ़ इंश्योरेंस, बिरला सनलाइफ़ लाइफ़ इंश्योरेंस शामिल हैं.
इसके अलावा एचडीएफ़सी स्टैंडर्ड लाइफ़ इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ़ इंश्योरेंस, आईएनजी वैश्य लाइफ़ इंश्योरेंस, कोटक महिंद्रा ओल्ड म्यूचुअल लाइफ़ इंश्योरेंस, मैक्स न्यूयॉर्क लाइफ़ इंश्योरेंस, मेटलाइफ़ इंडिया इंश्योरेंस, रिलायंस लाइफ़ इंश्योरेंस, एसबीआई लाइफ़ इंश्योरेंस, टाटा एआईजी लाइफ़ इंश्योरेंस और एगॉन रेलिगेयर लाइफ़ इंश्योरेंस पर भी पाबंदी लगाई गई है.
यूलिप बनाम म्यूचुअल फंड
सेबी का कहना है कि निजी कंपनियों द्वारा शुरू की गई यूलिप में निवेश म्यूचुअल फंडस जैसा है, लिहाजा इसके लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट लेना ज़रूरी है. सेबी के पूर्णकालिक सदस्य प्रशांत सरन ने अपने आदेश में कहा, "मैं इन कंपनियों को आदेश देता हूँ कि वे तब तक म्यूचुअल फंड जैसे किसी दूसरे निवेश उत्पाद के लिए निवेशकों से रकम इकट्ठा न करें, जब तक कि वे इसके लिए सेबी से ज़रूरी रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट हासिल नहीं कर लेंती."
सेबी ने 14 दिसंबर 2009 को एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ़ इंश्योरेंस कंपनी और बाकी 13 निजी कंपनियों को 15 जनवरी 2010 को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि सेबी नियमों का उल्लंघन करने पर क्यों नहीं उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए.
निजी बीमा कंपनियों ने अपने जवाब में दलील दी थी कि यूलिप जीवन बीमा उत्पाद है और प्रतिभूति क़ानून 1956 के तहत 'प्रतिभूति' की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आता. इसके अलावा कंपनियों ने ये भी तर्क दिया था कि यूलिप में निवेश म्यूचुअल फंड जैसा नहीं है क्योंकि यूलिप में निवेश पॉलिसीधारक के जीवन से जुड़ा होता है.












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