श्रीलंका संसदीय चुनाव में सत्ताधारी दल की जीत (राउंडअप)
कोलंबो, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। श्रीलंका के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन, युनाइटेड फ्रीडम पीपुल्स एलायंस (यूपीएफए) ने 225 सदस्यीय संसद में आधे से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर 26 वर्षो तक चले गृह युद्ध के बाद हुए प्रथम संसदीय चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई है।
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार गुरुवार को हुए मतदान के लिए हालांकि अभी कुछ मतों की गिनती बाकी रह गई है, लेकिन राजपक्षे के युनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम एलायंस (यूपीएफए) 225 सदस्यीय संसद में 117 सीटें पहले ही जीत ली है।
यूपीएफए के एक पूर्व मंत्री दुलास अलाहापेरुमा ने कहा, "हम सरकार बनाने के लिए जरूरी 113 सीटों का आंकड़ा पार कर चुके हैं।"
अलाहापेरुमा ने कहा, "यह इस बात का संकेत है कि विपक्ष के प्रति लोगों का विश्वास नहीं रह गया है। यह राजपक्षे की नीतियों का एक तरह से समर्थन है।"
शुक्रवार की शाम घोषित आंशिक परिणामों के अनुसार गुरुवार के मतदान में यूपीएफए को 60.43 प्रतिशत यानी 47 लाख वोट प्राप्त हुए हैं। वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी युनाईटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) को 29.43 प्रतिशत यानी 23 लाख वोट प्राप्त हुए हैं।
इस चुनाव में यूएनपी को अब तक 46 सीटें मिली हैं, जबकि तमिल नेशनल एलायंस को 12 सीटें प्राप्त हुई हैं और मार्क्सवादी पार्टी को पांच सीटें हासिल हुई हैं।
दो सीटों पर 17 अप्रैल को दोबारा मतदान होंगे। इन सीटों पर मतदान एजेंटों को सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों ने मारपीट कर भगा दिया था। इनमें से एक संसदीय क्षेत्र मध्य प्रांत में है। इस क्षेत्र में 38 स्थानों पर मतदान प्रभावित हुआ है। दूसरा संसदीय क्षेत्र पूर्वोत्तर, त्रिंकोमाली जिले में है। यहां दो मतदान केंद्रों पर मतदान प्रभावित हुआ है।
चुनाव विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि अंतिम परिणाम में विलंब हो गया है, लेकिन दो सीटों को छोड़ कर प्रारंभिक परिणाम शनिवार को घोषित कर दिया जाएगा।
इसके पहले सुबह घोषित नतीजों में कहा गया था कि युनाइटेड फ्रीडम पीपुल्स एलायंस (यूपीएफए) को रिकॉर्ड 692,096 यानी 61.08 फीसदी मत हासिल हुए। मुख्य विपक्षी दल युनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) को 304,693 यानी 26.89 फीसदी मत मिले।
देश में लंबे समय से चल रहे गृह युद्ध की समाप्ति और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ सेना की जीत का फायदा सत्ताधारी दल को मिलता दिख रहा है। इस साल जनवरी में हुए राष्ट्रपति चुनाव में भी सत्ताधारी दल को जीत मिली थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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