झारखंड में शिबू सरकार के 100 दिन पूरे

राज्य सरकार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखण्ड स्टुडेंट्स यूनियन (एजेएसयू) समर्थन दे रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा था कि 'लूटे गए पैसों को भ्रष्ट लोगों के पेट से निकाल लिया जाएगा' लेकिन राज्य में सरकार गठन के बाद ऐसा कुछ भी नहीं दिखा।
सोरेन सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी ए.के.सिंह को मुख्य सचिव नियुक्त किया, जिनपर भ्रष्टाचार का आरोप है। वर्ष 2003 में सतर्कता विभाग द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद सिंह ने बिहार की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। उन्हें बाद में निलंबित किया गया लेकिन जमानत मिलने के बाद उन्हें बहाल कर दिया गया।
आईएएस अधिकारी अरुण कुमार सिंह और सुखदेव सिंह को भी राज्य सरकार ने शहरी विकास विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया है, जबकि इन दिनों के खिलाफ अदालत में जनहित याचिका दायर है।
राज्य सरकार ने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जिनके आवासों पर आयकर विभाग ने फरवरी में छापेमारी की थी। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले पर भी राज्य सरकार ने झारखण्ड उच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर कर कहा कि इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की कोई जरूरत नहीं है।
कांग्रेस महासचिव शैलेश सिंह ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्ट लोगों को पनाह दे रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, "अब राज्य सरकार के लिए भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं रहा।" उधर, उप मुख्यमंत्री और झारखण्ड भाजपा के अध्यक्ष रघुबर दास ने कहा, "राज्य सरकार किसी को पनाह नहीं दे रही है। कानून को महत्व दिया जाता है। राज्य सरकार ने कई मामलों में जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें भ्रष्टाचार का संदेह है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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