दंतेवाड़ा की जाँच रिपोर्ट बुधवार को पेश होगी

सुवोजित बागची
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम छत्तीसगढ़ गई है और वो दंतेवाड़ा ज़िले में हुए नक्सलवादी हमले की जाँच रिपोर्ट बुधवार को पेश करेगी. केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस जाँच रिपोर्ट के आधार पर सरकार अपनी कार्रवाई तय करेगी.
इस दल में केंद्रीय सुरक्षा बल सीआरपीएफ़ के महानिदेशक और महानिदेशक (ऑपरेशन) शामिल हैं. पिल्लई का कहना था,''ये दल स्थानीय पुलिस और सुरक्षाबलों के घायल जवानों से बातचीत करने के बाद बुधवार को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.''
इस रिपोर्ट में उन परिस्थितियों और हालात का आकलन होगा जिसमें सीआरपीएफ़ और स्थानीय पुलिस दल पर हमला किया गया. दिलचस्प तथ्य ये है कि गृह सचिव जीएस पिल्लई का कहना था कि निशाना बने सुरक्षाकर्मियों को माओवादियों के बारे में 'विशेष गुप्तचर सूचना" मिली थी. सूचना के आधार पर अर्धसैनिक और पुलिस बल के जवान दंतेवाड़ा के जंगलों में गए.
सीआरपीएफ़ की 62वीं बटालियन को जंगल में लड़ाई का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और वे इन जंगलों में पिछले कुछ समय से नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाते रहे हैं. हालांकि जीएस पिल्लई इस बात को स्वीकार करने से इनकार करते हैं कि ये गुप्तचर व्यवस्था और अभियान की विफलता है.
उनका कहना था, वे दो दिन बाद लौट रहे थे और थके हुए होंगे और मुझे लगता है कि उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर थोड़ी ढील छोड़ दी होगी. पिल्लई का कहना था कि वो निश्चित रूप से थोड़े असावधान थे, अन्यथा वे सभी लोग नहीं मारे गए होते. गृह सचिव का कहना था,''दंतेवाड़ा कभी हमारा प्राथमिकता वाला क्षेत्र नहीं रहा है. राजनंदगाँव और कांकेर दो ज़िले हैं जहाँ अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. यहाँ हमने नागरिक प्रशासन बहाल किया है और हमारा ध्यान इन्हीं इलाक़ों पर है.''
उनका कहना था कि दंतेवाड़ा कभी हमारा प्रभुत्ववाला क्षेत्र नहीं रहा है. गश्त पर गया ये दल अपने प्रभुत्ववाले इलाक़े से बाहर चला गया और निशाना बन गया. गृह सचिव जीएस पिल्लई का कहना था कि रिपोर्ट आने के बाद बुधवार को तस्वीर साफ़ हो पाएगी.
ग़ौरतलब है कि भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा ज़िले में हुए नक्सलवादी हमले में 75 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. जब से भारत सरकार ने उन राज्यों में सुरक्षा बलों का अभियान चलाया है जहाँ माओवादी सक्रिय हैं, तब से इसे सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बीबीसी को बताया कि 400 से 500 माओवादी विद्रोहियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया था.
दंतेवाड़ा ज़िले में सुरक्षाबलों पर तीन स्थानों पर हमले हुए.केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस घटना के बारे में कहा, "छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मिलकर माओवादियों के ख़िलाफ़ साझा अभियान तैयार किया था. लेकिन मुझे लगता है कि रणनीति में चूक हो गई और वे माओवादियों के जाल में फँस गए. ये नक्सलियों की क्रूरता दर्शाता है."
'ऑपरेशन ग्रीन हंट का जवाब"
हमले के बाद बीबीसी से बातचीत में माओवादी नेता गोपालजी ने कहा है कि दंतेवाड़ा का हमला केंद्र सरकार के ऑपरेशन ग्रीनहंट का परिणाम है. बातचीत में उन्होंने कहा, "हमने कहा था कि ऑपरेशन ग्रीनहंट को वापस लिया जाए लेकिन ऐसा हुआ नहीं. हज़ारों अर्धसैनिक बलों को उतार दिया गया. इसी का परिणाम है दंतेवाड़ा की घटना."
गोपाल जी ने कहा कि उनके काडर पर ऑपरेशन ग्रीनहंट का कोई असर नहीं पड़ा बल्कि वे लोग और सतर्क और सजग हो गए हैं. उन्होंने कहा कि इस अभियान से काडर में नए क्रांतिकारी जोश का संचालन हुआ है और उन्हें ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ लड़ने का समय आ गया है.
इतने सारे लोगों को मारने के औचित्य पर सवाल उठाया गया तो उन्होंने कहा, "हमारे चारों ओर सैनिकों का घेरा है, आदिवासियों को मारा जा रहा है, जंगलों से भगाया जा रहा है, महिलाओं का सामूहिक बलात्कार किया जा रहा है. ऐसे में हमारे पास क्या विकल्प है." मसले को बातचीत से हल करने पर गोपालजी ने कहा, "हम तो बातचीत के लिए तैयार हैं. चिदंबरम जी ने कहा कि 72 घंटे के लिए संघर्षविराम करिए. किशनजी ने तो कहा था वो 72 दिन के संघर्षविराम के लिए हैं. हमने कहा था कि ऑपरेशन ग्रीनहंट बंद करें, बातचीत का माहौल बनाए.चिदंबरम जी बातचीत के नाम पर केवल उलझन पैदा करते रहे."
हमला
मंगलवार सुबह पाँच बजे केंद्रीय अर्धसैनिक बल यानी सीआरपीएफ़ का दस्ता चिंतलनार थाने के तालमेतला इलाक़े में गश्त के लिए निकला था. सबसे पहले छह बजे के आस-पास नक्सलियों ने इस दस्ते पर हमला कर दिया. अचानक हुए इस हमले में जवानों को संभलने का मौका नहीं मिला. इसमें एक सब इंस्पेक्टर और एक जवान की मौत हो गई. चार जवान घायल हो गए.
इस हमले की ख़बर मिलने के बाद एक बचाव दल को भेजा गया. इनके पास बख्तरबंद गाड़ी भी थी. नक्सलियों ने रास्ते में ही बचाव दल पर हमला कर दिया. इसमें वाहन के चालक और एक जवान की मौत हो गई और पाँच जवान घायल हो गए. इसके बाद तीसरी पुलिस पार्टी दोनापाल नेशनल हाइवे के रास्ते से घटनास्थल पहुँचने के लिए निकल पड़ी. लेकिन घाटी में जगह-जगह घात लगाकर बैठे माओवादी विद्रोहियों ने इन पर भी हमला कर दिया.












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