न्यायालय के फैसले से नहीं बनेगा मंदिर : विहिप (लीड-1)
राम मंदिर के निर्माण के लिए विहिप अब कोई आंदोलन नहीं करेगी बल्कि इसके लिए हनुमान चालीसा के पाठ के जरिए जनजागरण अभियान चलाएगी।
हिन्दू धर्माचार्य संस्था के अध्यक्ष दयानंद सरस्वती, महामंत्री स्वामी परमानंद सरस्वती, प्रयाग पीठ के वासुदेवानंद सरस्वती तथा स्वामी विशेश्वरानंद सरस्वती ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।
इससे पहले गाय, गंगा और रामजन्म भूमि मुद्दे को लेकर विहिप की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित हुआ, जिसमें कहा गया कि इन तीनों विषयों को केंद्र में रखकर विहिप के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
मार्गदर्शक मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए विहिप के अध्यक्ष अशोक सिंघल ने कहा, "रामजन्म भूमि मंदिर का निर्माण न्यायालय के फैसले से नहीं होगा। यह देश में एक भयंकर संघर्ष को जन्म देगा। इसके लिए विहिप एक जनजागरण अभियान चलाएगी।"
उन्होंने कहा, "16 अगस्त से 17 दिसंबर तक पूरे देश में यह जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक मंदिर को हुनमत शक्ति जागरण का केंद्र बनाकर तथा हनुमान चालीसा के पाठ के जरिए जनजागरण पैदा किया जाएगा।"
बैठक में राम जन्मभूमि के बारे में लाए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि संत समाज राजनीतिक दलों से आग्रह करता है कि वे राम जन्मभूमि मंदिर के मसले पर राजनीतिक स्वार्थो से उपर उठकर इसका समर्थन करें और एक मत से कानून बनाकर राम जन्मभूमि हिन्दू समाज को सौंप दें।
बैठक में संतों ने यह भी घोषणा की कि अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में किसी भी मस्जिद का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा और बाबर के नाम पर पूरे देश में मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी।
एक सवाल के जवाब में स्वामी परमात्मानंद जी ने कहा, "अटल विहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार की मजबूरियां रहीं होंगी या फिर उनकी कमजोरियां रहीं होंगी जिससे मंदिर का निर्माण नहीं हो सका। हम उनसे जुड़े नहीं हैं। किस प्रकार से इस मुद्दे का लाभ लेकर वोटों की राजनीति की गई लेकिन अब उसे दोहराने नहीं दिया जाएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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