गोविंदाचार्य ने राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का संयोजक पद छोड़ा

दिल्ली रवाना
जल्द ही भोपाल में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक शुरू वाले थी। लेकिन बैठक की शुरुआत से पहले ही शनिवार को के एन गोविंदाचार्य ने संयोजक पद की जिम्मेदारी छोड़ते हुए यह पद राकेश दुबे को सौंप दिया। गोविंदाचार्य खुद सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो गए। आंदोलन के सह संयोजक कैलाश तिवारी ने बताया है कि गोविंदाचार्य को आवश्यक कार्य से अचानक दिल्ली जाना पड़ा है। सूचना के मुताबिक वह राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संरक्षक की भूमिका का निर्वाह करते रहेंगे।
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गोविंदाचार्य को भाजपा से तब अपने रास्ते अलग करने पड़े थे जब उन्होने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को मुखौटा कहा था। आगे चलकर उन्होंने 15 मई 2004 को सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाने के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का गठन किया था।
घर वापसी का मूड तो नहीं
कुढ ही दिन पहले भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने बयान दिया था कि कुछ अनुभवी नेताओं की घर वापसी हो सकती है। इन नेताओं में पहले नंबर पर उमा भरती का नाम लिया जा रहा है। अब गोविंदाचार्य ने भी उमा भारती के नक्शेकदम पर चलते हुए अपने ही संगठन से इस्तीफा दे दिया है। तो इस बात की भी प्रबल संभावनाएं बन सकती हैं कि गोविंदाचार्य भी घर वापसी के मूड में आ गए हों।
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नितिन गडकरी संघ की आंखों के तारे माने जाते हैं। गडकरी ने भाजपा के नेतृत्व में अचानक बड़े परिवर्तन किए हैं। उन्होने भाजपा के सभी महत्वपूर्ण पदों की बागडोर युवा नेतृत्व के हाथों में सौंप दी थी। जिसके चलते पार्टी में कुछ अंदरूनी तनातनी भी पैदा हुई थी। लेकिन लगता है गडकरी के अपने विरोधियों के मुंह बंद करने के इरादे रखते हैं। गोविंदाचार्य का उमा भारती के पगचिन्हों पर चलना गडकरी की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।












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