भाजपा की शरण में पहुंचे अमिताभ
अमिताभ ने चला था दांव
लेकिन अमिताभ को इतनी लोकप्रियता से संतोष कहां है। सो उन्होने मनोरंजन राजनीतिक गलियारों में सेंधमारी शुरू कर दी। एक खेमे से संबंध बिगड़ने के बाद दूसरे खेमें में घुसने की उनकी चाहत ने उन्हे तीसरे खेमे की आंख की किरकिरी बना दिया।
सालों तक अमर सिंह के बलबूते अमिताभ एंड फैमिली सपा के बैनर तले छिपे रहे। लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं रहे। अमर सिंह को सपा ने बाहर का रास्ता दिखाया। और उनका मोर्चा कमजोर देख अमिताभ एंड फैमिली ने उनका आसरा भी छोड़ दिया। अब हालात ये हैं कि जया सपा के एक कोने से अमर सिंह को मिस करने की गुहार लगा रही हैं। अमर सिंह भी उनकी पैंतरेबाजियां समझ गए हैं तो वह भी उसी अंदाज में उन्हे मिस करने की बांग दे रहे हैं। मुद्दा तब से गर्माया जब से अमिताभ भैया ने नरेंद्र मोदी से गुजरात का ब्रैंड एंबैस्डर बनने की ख्वाहिश जाहिर कर दी।
कांग्रेस को लगी मिर्च
मौका अच्छा देख मोदी दादा ने भी अमिताभ को गुजरात के पर्यटन की बागडोर थमा दी। ऐसे में कांग्रेस के कान खड़े होने ही थे। आखिर अमिताभ गांधी फैमिली के पुराने मित्र जो थे। दादा का हाथ पकड़ अमिताभ ने सोचा था कि उनकी वैतरणी पार लग ही जाएगी। लेकिन शायद वह ये भूल गए कि उन्हे गुजरात के बाहर ही रहना होता है वहां जहां राज किसी का और नाम दूसरे का चलता है। तो भैया अब कौन समझाए अमिताभ जी को कि अगर सियासी दांव-पेंच चलेंगे तो हर कोई कैसे खुश रहेगा। खैर अब अमिताभ अपने ब्लॉग पर महाराष्ट्र वालों का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। जिन्हो ने उन्हे इतना कुछ दिया।
मसला पूरी तरह से सियासी रंग पकड़ चुका है।













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