मलेशिया में उपेक्षित नहीं हैं तमिल स्कूल और साहित्य
कुआलालंपुर, 31 मार्च (आईएएनएस)। मलेशिया में भारतीय जातीय अल्पसंख्यकों द्वारा तमिल स्कूलों और साहित्य के प्रति सौतेला व्यवहार अपनाए जाने की आलोचना के बीच उप प्रधानमंत्री मुहिउद्दीन यासीन ने कहा है कि ये संस्थान राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
मलेशियाई संसद के कुछ सदस्यों के इन आरोपों को गलत बताते हुए यासीन ने मंगलवार को कहा कि तमिल स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं और किसी भी छात्र पर स्कूल में तमिल भाषा सीखने पर रोक नहीं है।
विपक्ष की डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (डीएपी) के एक भारतीय विधायक एम. मनोगरन के सवाल के जवाब में यासीन ने यह बात कही। मनोगरन ने पूछा था कि मैट्रिक की परीक्षा में तमिल भाषा और साहित्य को एक अतिरिक्त विषय के रूप में क्यों शामिल किया गया है।
यासीन ने कहा कि सरकार ने चीनी और तमिल स्कूलों के शिक्षकों को तनख्वाह देने के लिए 54.9 करोड़ डॉलर की राशि दी है। उनका कहना है कि यदि चीनी और तमिल स्कूलों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा होता तो इतनी राशि क्यों दी जाती।
यासीन देश के शिक्षा मंत्री भी हैं। उन्होंने समाचार पत्र 'न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स' के हवाले से कहा है कि छात्रों के स्कूलों में तमिल सीखने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
मलेशिया में करीब 100 वर्ष पहले से स्थापित 525 तमिल स्कूल हैं। यहां मलय लोग बहुसंख्यक हैं जबकि भारतीय और चीनी अल्पसंख्यक भी यहां रहते हैं।
भारतीय अल्पसंख्यकों में ज्यादातर तमिल हैं। वे ब्रिटिश काल में यहां आए थे और मलेशिया की 2.8 करोड़ की आबादी का करीब सात प्रतिशत हिस्सा हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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