'चीन में हज़ारों को सजा- ए- मौत '
मानवाधिकार
संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि चीन में पिछले साल हज़ारों लोगों को मौत की सज़ा दी गई। एमनेस्टी ने चीन सरकार से मांग की है कि वो उन क़ैदियों की वास्तविक संख्या बताए जिन्हें मौत की सज़ा दी गई है। id="toptextpromo">एमनेस्टी
ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में ये भी कहा है कि साल 2009 में अकेले चीन में इतने लोगों को मौत की सज़ा दी गई जितने के पूरे दुनिया में मारे गए हैं। एमनेस्टी का कहना है कि दो दिहाई देशों ने मौत सज़ा को समाप्त कर दिया है लेकिन पूरी दुनिया में सात सौ से अधिक लोगों को मौत की सज़ा दी गई। चीन के बाद दूसरा स्थान ईरान का है जहां अनेक लोगों को मौत की सज़ा दी गई। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>एमनेस्टी
की सूची में इसके बाद इराक़, सऊदी अरब और अमरीका का नंबर है। मानवाधिकार संस्था का कहना है कि दुनिया भर के नेता मानवाधिकारों के बढ़ रहे उल्लंघन को रोकने में असफल रहे हैं। उसके अनुसार अनेक देशों में लोगों को यातनाएँ दी जा रही हैं और उनके साथ बुरा व्यवहार हो रहा है। एमनेस्टी के मुताबिक लोगों को ऐसे मुकदमों का सामना करना पड़ता है जिनमें निष्पक्षतापूर्वक मुक़दमा नहीं हो पाता और ऐसे भी देश हैं जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है।











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