उत्तर भारत में शिक्षा के स्तर में सुधार हो : सीआईआई
चण्डीगढ़, 29 मार्च (आईएएनएस)। उद्योग समूह भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक अध्ययन में कहा गया है कि उत्तर भारत के राज्यों को शैक्षिक स्तर के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि यहां की कामकाजी युवा खुद को बाजार में मौजूद नौकरियों के अनुरूप ढाल सकें।
पेशेवर सेवा प्रदाता केपीएमजी के अध्ययन के मुताबिक, "मौजूदा समय में यह क्षेत्र देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों से पिछड़ रहा है। पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों की साक्षरता दर 69 फीसदी और 71 फीसदी के मुकाबले इस क्षेत्र की साक्षरता दर केवल 60 फीसदी ही है। इसके अलावा इस क्षेत्र में शिक्षा और कुशल बुनियादी सुविधाओं को उन्नत किए जाने की जरूरत है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016 तक उत्तर भारत में 15 से 24 साल आयु वर्ग वाले लोगों की संख्या करीब 10.6 करोड़ तक हो जाएगी। इस हिसाब से करीब 3.34 करोड़ छात्रों के उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में प्रवेश लेने की संभावना है। इनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 84 अरब डॉलर की जरूरत होगी।
दक्षिण के राज्यों में 100 वर्ग किलोमीटर पर 4.7 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हैं जबकि उत्तर भारत में यह आंकड़ा प्रति 100 वर्ग किलोमीटर 1.7 का है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और गुजरात की तुलना में उत्तर भारत में चिकित्सा कॉलेजों की संख्या भी कम है। देश के 63 फीसदी चिकित्सा कॉलेज इन्हीं राज्यों में हैं।
सीआईआई के उत्तरी क्षेत्र के चेयरमैन हरपाल सिंह ने कहा, "उत्तर भारत के राज्यों में 2001 से 2026 के बीच आबादी में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। ऐसे में इस क्षेत्र को ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सíवस।












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