तापमान बढ़ने के कारण कश्मीर में समय पूर्व पहुंचे चरवाहे
खानाबदोश लोग आम तौर पर अप्रैल-मई में अपने पशुओं और भेड़ों के साथ पहाड़ियों पर जाते हैं और छह महीनों तक वहां चराई करते हैं। वे जाड़े के लिए अक्टूबर महीने में जम्मू के मैदानी इलाकों में वापस लौट आते हैं।
जनजाति अनुसंधान एवं सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के सचिव जावेद राही ने कहा, "लेकिन इस वर्ष शिवालिक और पीर पंजाल की पहाड़ियों के लिए जनजाजियों की यात्रा मार्च के आखिर में ही शुरू हो गई।"
जम्मू क्षेत्र का तापमान लगभग 36 डिग्री तक पहले ही पहुंच चुका है। राही ने कहा, "पिछले 29 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब खानाबदोश जनजातियों ने असामान्य ऊंचे तापमान के कारण मार्च महीने में ही अपने मौसमी पलायन की योजना तैयार कर ली है। इस समय जम्मू क्षेत्र का अधिकतम तापमान सामान्य से आठ डिग्री ऊपर है।"
गुज्जर और बकरवाल पशुपालन पर निर्भर होते हैं, लिहाजा वे प्रति वर्ष अनुकूल जलवायु वाले उन इलाकों में चले जाते हैं, जहां उनके पशुओं के लिए चारे हों और वे वहां सहज रूप में रह सकें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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