अल्लावी ने सुलह समझौते का हाथ बढ़ाया

इराक़ में हुए संसदीय चुनाव के विजेता अयाद अलावी ने नई सरकार के गठन के लिए सभी दलों के साथ मिलकर काम करने की पेशकश की है.
राजधानी बग़दाद में आयोजित अपने पहले पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि वो सभी दलों से बातचीत करने को तैयार हैं.
अयाद अलावी ने कहा, "इराक़ी जनता ने इराक़िया गुट को चुनकर हमें धन्य किया है. हम सभी दलों से बात करने को तैयार हैं जिसमें भाई नूरी अल मलिकी का गुट सबसे पहले है. इराक़ किसी एक व्यक्ति या एक पार्टी का नहीं बल्कि सभी इराक़ियों का है."
उल्लेखनीय है कि इस पत्रकार सम्मेलन को इराक़ के प्रमुख टेलीविज़न चैनल इराक़िया पर दिखाया गया. चुनाव अभियान के दौरान इस चैनल ने अयाद अलावी को अपनी बात कहने के लिए कम ही समय दिया था और प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी पर ही अधिक ध्यान केंद्रित किया था.
स्पष्ट बहुमत नहीं
इराक़ी संसद की कुल 325 सीटों में से अयाद अलावी के गुट को 91 और प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के गुट को 89 सीटें मिली हैं. यानी दोनों के बीच अंतर केवल दो सीटों का है. इराक़ी नेशनल एलायंस 70 सीटें जीतकर तीसरे नंबर पर आया है.
अयाद अलावी को संसद में अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए कुल 163 सीटें चाहिए. लेकिन उनका गुट सबसे बड़े गुट के रूप में उभरा है इसलिए उन्हे सरकार बनाने का न्योता दिया जाएगा. अगर वो 30 दिनों के भीतर ऐसा करने में सफल न हुए तो दूसरे सबसे बड़े गुट को आमंत्रित किया जाएगा.
अयाद अलावी ने बहुमत जुटाने के लिए अन्य दलों से बातचीत करना शुरू कर दिया है. उन्होने कहा कि उन्होंने रफ़ी अल इस्सावी को अपना उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया है और वो ही अन्य दलों से बात करेंगे. रफ़ी अल इस्सावी एक सुन्नी राजनेता हैं.
ये सच है कि अलावी को कोई भारी विजय हासिल नहीं हुई लेकिन इराक़ की जटिल और बंटी हुई राजनीति को देखते हुए इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा.
अयाद अलावी ने एक ऐसे अनुभवी राजनेता की भाषा का प्रयोग किया जो दलगत और सांप्रदायिक राजनीति से ऊपर उठकर देश के भले के लिए काम करना चाहते हैं.
जिन शब्दों का प्रयोग उन्होने किया उसमें सबको साथ लेकर चलने और मेलमिलाप के स्वर सुनाई दिए. लेकिन उनकी सफलता इस बार पर निर्भर करेगी कि वो घरेलू और क्षेत्रीय समस्याओं के बारूदी मैदान को कितनी होशियारी से पार करते हैं.
अलावी के सामने चुनौतियां
अयाद अलावी एक धर्मनिरपेक्ष राजनेता हैं इसलिए ईरान उनके आने से ख़ुश नहीं होगा. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता लाना इराक़ियों की ज़िम्मेदारी है न कि अमरीकियों की. अयाद अलावी ने कहा, "अमरीकी हमारी रक्षा करने के लिए हमेशा यहां नहीं रह सकते."
इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने कहा है कि वो मतगणना को चुनौती देंगे. राष्ट्रीय टेलीविज़न पर मलिकी ने कहा कि वो इसके लिए क़ानूनी प्रक्रिया का सहारा लेंगे. शिकायत दर्ज करने के लिए उनके पास सोमवार तक का समय है.
चुनाव और न्यायिक अधिकारी मलिकी की चुनौती पर विचार कर रहे हैं.
लेकिन अगर इराक़ में सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्वक निपट जाता है और अलावी इराक़ के विभिन्न धड़ों को समझाने बुझाने में सफल हो जाते हैं तो समझा जाएगा कि इराक़ी लोकतंत्र अब अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है.












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