परिवादों के निस्तारण में समझौता सबसे बेहतर : रवीन्द्रन
सेमिनार के मुख्य अतिथि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश आर.वी. रवीन्द्रन ने कहा कि मध्यस्थता एवं समझौता सामान्य परिवादों के निस्तारण का सबसे बेहतर रास्ता है, इससे अदालतों में अनावश्यक परिवादों का बोझ कम होगा और गंभीर परिवादों के निर्णयों में देरी से निजात मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आज भी व्यक्ति निर्णय में देरी, अनिश्चितता, लागत, न्यायालय के अलचीलेपन सहित अन्य कारणों की वजह से न्यायालय में जाने से डरता है। मध्यस्थता एवं समझौता की प्रक्रिया से यह समस्या दूर होगी और लोगों के सामान्य परिवाद आसानी से सुलझ सकेंगे।
रवीन्द्रन ने कहा कि न्यायालय में लंबित मामलों का समय पर निस्तारण हो इसके लिए न्यायालय से परिवादों का भार कम करना जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि सिविल न्यायालयों में गंभीर मामलों पर ही विचार हो। सामान्य मामले मध्यस्थता और लोक अदालतों के माध्यम से ही निस्तारित हो जाएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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