पोप पर आरोप का वेटिकन में विरोध

ये आरोप यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के परिजनों ने लगाए हैं. मीडिया में ऐसी ख़बरों के छपने के बाद वेटिकन के समाचार पत्र में एक संपादकीय प्रकाशित हुआ है जिसमें मीडिया को आड़े हाथों लिया गया है. वेटिकन के समाचार पत्र ने मीडिया पर आरोप लगाया है कि मीडिया ने तथ्यों की अनदेखी की है और पोप पर गल़तियों के अन्यायपूर्ण दोष मढ़े हैं.
पोप पर आरोप
दरअसल, ताज़ा ख़बरें पोप के बारे में जो बातें कहती हैं उनका ताल्लुक 90 के दशक के दौरान उनकी स्थिति और कामकाज से है. उन दिनों पोप कार्डिनल जोसफ़ रैटज़िगर के नाम से जाने जाते थे और वे वैटिकन में उस विभाग की अध्यक्षता कर रहे थे जो यौन शोषण के मामलों से निपटता था.
न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि 90 के दौर में एक मामला पादरी लॉरेंस मर्फ़ी को लेकर उठा था. पादरी पर आरोप था कि उन्होंने 230 ऐसे बच्चों का यौन शोषण किया जो सुन नहीं सकते थे. अख़बार के मुताबिक वर्तमान पोप और उस समय के कार्डिनल जोसफ़ रैटज़िगर ने इस मामले पर कोई क़दम नहीं उठाया था. अख़बार में ये भी प्रकाशित किया गया है कि जब इस पादरी ने ख़राब सेहत की बात की तो कार्डिनल जोसफ़ रैटज़िगर के सहयोगी ने चर्च की सुनवाई रोक दी थी.
'दुखद घटना'
वैटिकन ने इस मामले को दुखद बताया है लेकिन साथ ही कहा कि मामले की लीपापोती करने की कोशिश नहीं की गई. कई महीनों से ये आरोप लगते आ रहे हैं कि जर्मनी समेत यूरोप के कई देशों में कैथलिक पादरियों द्वारा यौन शोषण करने के मामलों को दबाया जा रहा है.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 1996 में कार्डिनल रैटज़िंगर को दो बार निजी स्तर पर पत्र भेजे गए लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. गुरुवार को यौन शोषण का शिकार हुए कुछ लोगों ने वैटिकन के बाहर एक पत्रकार वार्ता के दौरान ये दस्तावेज़ दिखाए. कुछ दिन पहले पोप बेनेडिक्ट ने आयरलैंड में कैथलिक पादरियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण के मामले में पीड़ितों से 'माफ़ी' माँगी थी.












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