परमाणु सहयोग पर वार्ता से संतुष्ट : क़ुरैशी

Shah Mahmood Qureshi
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि परमाणु सहयोग पर अमरीका के साथ बातचीत को लेकर वे संतुष्ट हैं. अमरीका के साथ पहली सामरिक वार्ता के लिए पाकिस्तानी दल दो दिनों से वाशिंगटन में था. इसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी और सेना अध्यक्ष कियानी शामिल थे.

रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि परमाणु सहयोग, परमाणु अप्रसार और निर्यात को लेकर अमरीका के साथ बातचीत ठीक रही. परमाणु समझौते के मुद्दे पर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं इस समय परमाणु मुद्दे पर विस्तार से कुछ नहीं कहना चाहूँगा."

सामरिक वार्ता शुरु होने से पहले क़ुरैशी ने कहा था कि पाकिस्तान बिना किसी भेदभाव के ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच चाहता है जिसका मतलब टीकाकार परमाणु समझौता करना लगा रहे थे. लेकिन अब तक के अमरीकी रुख़ से ऐसे आसार नज़र नहीं आ रहे. गुरुवार को हुई संयुक्त पत्रकार वार्ता में जब हिलेरी क्लिंटन से पाकिस्तान के साथ परमाणु समझौते के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने सीधा-सीधा जवाब नहीं दिया था. हिलेरी ने कहा था कि पाकिस्तान की ऊर्जा ज़रूरतें पूरे करने के लिए अमरीका वहाँ तीन थर्मल प्लांट लगाने में मदद करेगा.

परमाणु सहयोग का ज़िक्र नहीं

अमरीका-पाकिस्तान की दो दिन की वार्ता के बाद जो बयान जारी किया गया है उसमें परमाणु मुद्दे का ज़िक्र नहीं है. वहीं सीएनएन को दिए इंटरव्यू में क़ुरैशी ने कहा कि अगर अमरीका पाकिस्तान में ड्रोन हमले उसे करने दे तो इससे अमरीकी छवि सुधरेगी. विदेश मंत्री ने कहा कि अमरीकी ड्रोन हमलों को लेकर संप्रभुता का मुद्दा है और पाकिस्तानी जनता उसे लेकर काफ़ी संवेदनशील है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमरीका ने पाकिस्तानी अनुरोध को माना है तो क़ुरैशी ने कहा, “मुझे नहीं लगता." सामरिक वार्ता के बाद बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी सामग्रियों के लिए अमरीकी बाज़ार में पहुँच बढ़ाने के लिए अमरीका काम करेगा. पाकिस्तान में निवेश बढ़ाने के लिए दोनों देश द्विपक्षीय निवेश संधि पर बात करने को लेकर भी सहमत हुए हैं.

वहीं पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद के बारे में हिलेरी क्लिंटन ने सिनेट समिति के सामने अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अमरीकी अभियान न सिर्फ़ अफ़ग़ानिस्तान में सफलता के ज़रुरी है बल्कि अमरीका के हितों के लिए भी अहम है.

हिलेरी ने कहा, "एक साल पहले सोचिए क्या हालात थे. चरमपंथी इस्लामाबाद से 100 मील की दूरी पर थे. सीमावर्ती इलाक़े से अमरीकी सेना पर हमले करने में उन्हें किसी बाधा का सामना नहीं करना पड़ता था. लेकिन उसके बाद से पाकिस्तानी सरकार ने स्वात और वज़ीरिस्तान में अभियान छेड़ा है." सामरिक वार्ता का अगला दौर इस्लामाबाद में होगा.

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