हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमे हटाने से इनकार

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमों को वापस लेने और उन्हें देश में बुलाने की याचिका पर सरकार को ज़रूरी क़दम उठाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है.
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने एमएफ़ हुसैन को भारत बुलाने वाली याचिका को ख़ारिज किया. अदालत ने अर्ज़ी ख़ारिज करते हुए याचिकाकर्ता से पूछा, "अगर हुसैन दोहा में रह रहे हैं तो इसमें परेशानी क्या है."
याचिका में हुसैन के ख़िलाफ़ देश में सभी लंबित मामलों को ख़त्म करने की अपील की गई थी, ताकि भारत में उनकी वापसी सुनिश्चित की जा सके. एमएफ़ हुसैन इस समय क़तर की राजधानी दोहा में रह रहे हैं और उन्होंने क़तर की नागरिकता भी हासिल कर ली है. हुसैन भारतीय पासपोर्ट दोहा स्थित भारतीय दूतावास को सौंप चुके हैं.
95 वर्षीय हुसैन के चित्रों को लेकर चल रहे विवाद पर कई मामले अदालत में लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सारे मामले दिल्ली की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिए गए हैं. भारत के हिंदूवादी संगठनों ने उन पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और उन्हें अश्लील रुप में प्रदर्शित करने का आरोप लगाया है. देश में कई जगहों पर उनकी चित्र प्रदर्शनियों पर हमले भी हुए हैं.
हुसैन की चित्र प्रदर्शनियों पर हुए हमले और उनको मिली धमकी पर भारत में बुद्धिजीवियों ने चिंता ज़ाहिर की थी और दुख जताया था. इसके बाद वर्ष 2006 में हुसैन देश से बाहर चले गए और तब से वे दुबई या लंदन में रह रहे थे, लेकिन पिछले दिनों उन्होंने क़तर की नागरिकता ले ली है.












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