स्टीफन कोर्ट आग में 12 अब भी लापता (राउंडअप)
इमारत के मालिक का अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है।
उधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने यह स्वीकार किया है कि इमारत की ऊपरी दो मंजिलों का निर्माण अवैध तरीके से किया गया था।
मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने विधानसभा में कहा कि जांच करवाकर पता लगाया जाएगा कि दो मंजिलों के निर्माण की अनुमति किसने दी थी।
इस अग्निकांड में मारे गए चार लोगों के शवों पर एक से अधिक परिवारों के दावे के बाद अधिकारियों ने अब मारे गए लोगों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण कराने का फैसला किया है।
सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में बुधवार को पहले रुही परवीन, पम्पा चटर्जी और भाग्यश्री धाली के नाम से पहचाने गए शवों को लेकर विवाद हो गया। ये सभी निजी कंपनियों में काम करते थे।
गुरुवार सुबह हादसे में मारे गए विद्युत आचार्य और प्रीतिश घोष (दोनों की उम्र 20 वर्ष के करीब) के परिजनों ने इनकी पहचान अपने रिश्तेदार के रूप में की। इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) जावेद शमीम ने आईएएनएस को बताया कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
घोष विप्रो टेक्नोलॉजीज का और आचार्य चौथी मंजिल पर एक सॉफ्टवेयर कंपनी के कर्मचारी थे।
रोते हुए प्रमोती घोष ने कहा, "मैं निश्चित हूं कि यह मेरे बेटे का शव है। इसे मुझे दिया जाना चाहिए।"
रुही की पहचान उसके परिजनों ने उसके द्वारा पहनी गई अंगूठी से की थी लेकिन एक रेलवे कर्मचारी भास्कर चक्रबर्ती ने दावा किया कि यह शव रुही का नहीं वरन उनकी पत्नी ताप्ती का है।
सीएफएसएल के विशेषज्ञों के एक दल ने मृतकों के मां-बाप या बच्चों की अस्थि-मज्जा के नमूनों को एकत्र करने का काम शुरू कर दिया है।
शमीम ने कहा कि शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी पहचान करना वास्तव में बहुत कठिन काम होगा। अधिकारियों ने अब मारे गए लोगों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण कराने का फैसला किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications