आडवाणी पर कांग्रेस व वामपंथियों का हमला (राउंडअप)
भाजपा प्रवक्ता रामनाथ कोविंद से जब संवाददाताओं ने अयोध्या के तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक अंजू गुप्ता द्वारा रायबरेली की एक विशेष अदालत में दिए गए बयान के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "भाजपा इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी। यह मामला अदालत में है।"
अयोध्या में उस समय सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात पुलिस अधिकारी अंजू गुप्ता शुक्रवार को यहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत में गवाही दे रही थीं। गुप्ता ने कहा कि मस्जिद विध्वंस के पूर्व छह दिसंबर 1992 को खुश नजर आ रहे थे।
गुप्ता ने ढाई घंटे तक चली अपनी गवाही के दौरान कहा, "आडवाणी न केवल खुश दिख रहे थे, बल्कि उन्होंने भारी भीड़ के समक्ष ऐलान भी किया था कि विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।"
भाजपा के दूसरे प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी से इंकार कर दिया और संवाददाताओं से कहा कि इस मामले में पार्टी की ओर से टिप्पणी की कोई आवश्यकता नहीं है।
उधर कांग्रेस ने आडवाणी पर हमला तेज कर दिया। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा नेता को जनता की अदालत ने पहले ही दोषी ठहरा दिया है।
पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पुलिस अधिकारी की गवाही कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता नीलोत्पल बसु ने कहा कि पार्टी हमेशा से कहती आई है कि आडवाणी बाबरी विध्वंस में शामिल थे।
बसु ने कहा कि पुलिस अधिकारी की गवाही से माकपा का पक्ष पुष्ट हो गया है। यह बहुत अच्छा हुआ है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की राष्ट्रीय परिषद के सचिव शमीम फैजी ने कहा कि पुलिस अधिकारी की गवाही से इस संदेह की पुष्टि हो गई है कि आडवाणी बाबरी विध्वंस और देश में सांप्रदायिक भेद पैदा करने की साजिश में शामिल थे।
पुलिस अधिकारी गुप्ता ने कहा है, "आडवाणी ने भड़काऊ भाषण दिया था, जिसका पार्टी के अन्य सहयोगियों और भीड़ ने करतल ध्वनि से स्वागत किया था।"
गुप्ता ने कहा, "मंच पर आडवाणी के साथ लगभग 100 लोग मौजूद थे। इनमें मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, अशोक सिंघल, एस. सी. दीक्षित शामिल थे। मुझे उन सभी के चेहरे इतने याद हैं कि आज भी उनमें से कम से कम 80 को मैं पहचानने की स्थिति में हूं।"
बाबरी विध्वंस के दिन अपनी आंखों से देखे दृश्यों के बारे में उन्होंने कहा, " भीड़ में बहुत उत्साह था और ढांचे के ढह जाने के बाद मिठाइयां बांटी गई थीं।"
गुप्ता के बयान के अनुसार हो सकता है कि आडवाणी मस्जिद ढहाए जाने में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न रहे हों, लेकिन उन्होंने आग भड़काई थी और मस्जिद ढहाए जाने का रास्ता साफ किया था।
वर्तमान में देश की बाह्य खुफिया एजेंसी, रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ) में पुलिस उपमहानिरीक्षक गुप्ता आज करीब 11 बजे अदालत परिसर पहुंचीं। उनके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
गुप्ता ने यह भी कहा कि आडवाणी और उमा भारती ने 16वीं सदी के मस्जिद के गुंबद पर चढ़े कारसेवकों से नीचे उतरने का आग्रह भी किया था। मस्जिद पर चढ़े कारसेवकों के हाथों में छड़, कुदाल, हथौड़ा और रस्सी देखी जा सकती थी।
गुप्ता ने अदालत में कहा, "आडवाणी विवादित स्थल के पास जाने के लिए बहुत व्यग्र थे, ताकि वे गुंबद पर चढ़े कारसेवकों को नीचे उतरने के लिए मना सकें। लेकिन मैंने उन्हें सलाह दी कि वे ऐसा न करें, क्योंकि यह उनके लिए काफी असुरक्षित हो सकता था।"
गुप्ता ने कहा, "लेकिन उन्होंने उमा भारती को आगे बढ़ने के लिए कहा। और विवादित ढांचे के पास से लौटने के बाद उमा भारती ने आडवाणी से कहा कि उन्होंने कारसेवकों को नीचे उतरने की सलाह दी, ताकि वे ज्यादा समझदारी के साथ कारसेवा कर सकें।" गुप्ता के इस बयान से संकेत मिलता है कि ढांचे को ढहाए जाने की गंभीर योजना से दोनों नेता वाकिफ थे।
इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने आडवाणी के खिलाफ आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप केवल संदेह पर आधारित हैं। इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने आडवाणी के खिलाफ धारा 120 बी के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने के गंभीर मामले को वापस ले लिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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